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मेड़ता की ‘छोटी देवी हत्याकांड’—न्याय की राह अब भी अधूरी, एसपी का तबादला… पर राज आज भी बरकरार

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          तेजाराम लाडणवा
नागौर जिले के मेड़ता सिटी में हुआ चर्चित छोटी देवी प्रजापति हत्याकांड आज भी पुलिस के लिए एक बड़ी पहेली बना हुआ है। वर्षों बीत जाने के बावजूद इस सनसनीखेज हत्या के आरोपियों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी।
नागौर जिले में पुलिस अधीक्षक रहते हुए मृदुल कच्छावा ने कई बड़े अपराधियों पर कार्रवाई कर अपनी अलग पहचान बनाई और अपराध नियंत्रण में कई नवाचार भी किए। लेकिन मेड़ता की छोटी देवी हत्याकांड का पर्दाफाश उनके लिए भी एक बड़ी चुनौती बना रहा।
इस हत्याकांड को लेकर मेड़ता सहित पूरे क्षेत्र में समय-समय पर सर्व समाज ने जोरदार आंदोलन किए। कई बार अनोखे तरीके से प्रदर्शन कर पुलिस से आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग उठाई गई। मेड़ता से समाज के लोगों ने नारायण प्रजापति के नेतृत्व में कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपे और मेड़ता से लेकर नागौर जयपुर तक पैदल मार्च एवं धरने-प्रदर्शन भी किए।
बताया जाता है कि पुलिस ने इस मामले में कई बार जांच की दिशा बदली, संदिग्धों से पूछताछ की और इलाके का चप्पा-चप्पा खंगाला, लेकिन इसके बावजूद हत्यारों तक पहुंच नहीं बन सकी। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा कि आधुनिक तकनीक और संसाधनों के बावजूद अपराधी पुलिस से कई कदम आगे कैसे निकल जाते हैं।
इधर नागौर पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के तबादले की खबर सामने आने के बाद छोटी देवी के परिजनों और समाज में फिर निराशा का माहौल है। लोगों को उम्मीद थी कि उनके कार्यकाल में इस हत्याकांड का खुलासा होगा और दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जाएगा, लेकिन अब तक यह मामला अनसुलझा ही बना हुआ है।
अब सवाल यह है कि छोटी देवी प्रजापति को न्याय कब मिलेगा और आखिर कब पुलिस इस रहस्य से पर्दा उठाकर असली हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचाएगी। मेड़ता में यह हत्याकांड आज भी चर्चा और सवालों के केंद्र में बना हुआ है।

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