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स्कूल वाहनों में खतरनाक लापरवाही उजागर — बच्चों की जान जोखिम में, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई की जरूरत

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मेड़ता सिटी (तेजाराम लाडणवा)

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशों की पालना में बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मेड़ता की विशेष टीम द्वारा रियाबड़ी ब्लॉक के कई विद्यालयों की बाल-वाहिनियों का औचक निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण ने स्कूलों की परिवहन व्यवस्था में फैली गंभीर लापरवाही की चौंकाने वाली हकीकत को सामने ला दिया, जिसे देखकर प्रशासन की भी आंखें खुलना लाज़िमी है।

अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मेड़ता श्री अरुण कुमार बेरीवाल तथा सचिव स्वाति शर्मा के आदेशानुसार टीम ने अलग-अलग स्कूल वाहनों की जांच की। निरीक्षण में पीला रंग, GPS मशीन, अग्निशमन यंत्र, प्राथमिक चिकित्सा पेटी, फिटनेस, बीमा, परमिट, ड्राइवर परिचालक की पहचान और वाहन की स्पीड जैसी अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई।

संस्कार चिल्ड्रन अकैडमी की बड़ी लापरवाही— वाहन बिना नम्बर, बिना लाइसेंस, बिना वैध कागजात के चल रहा

जांच के दौरान संस्कार चिल्ड्रन एकेडमी, रियाबड़ी द्वारा संचालित बाल-वाहिनी में किसी भी प्रकार के वैध दस्तावेज नहीं मिले।

न वाहन का नंबर

न ड्राइवर का लाइसेंस

न बीमा

न फिटनेस

न परमिट

बच्चों को जिस वाहन से रोज स्कूल भेजा जा रहा था, वही वाहन खुद गैर-कानूनी तरीके से सड़क पर दौड़ रहा था। यह स्थिति किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को न्यौता दे सकती थी।

स्कूल पर बड़ा खुलासा— वाहन में क्षमता से दोगुने से भी ज्यादा बच्चे ठूंसे गए

टीम ने राजस्थान मे पब्लिक स्कूल, रियाबड़ी की बाल-वाहिनी में क्षमता से दोगुना से भी अधिक बच्चों को ले जाते पाया। यह सीधे तौर पर बच्चों के जीवन को खतरे में डालने जैसा कृत्य है।
ओवरलोड वाहन, स्कूल बसों के लिए सबसे बड़ा जोखिम होता है, और इसकी जिम्मेदारी सीधे शिक्षा संस्थान के प्रबंधन पर जाती है।

सरकार व परिवहन विभाग को जगाने वाली तस्वीर — अब प्रदेशभर में कार्रवाई की मांग

निरीक्षण के दौरान सामने आई गंभीर कमियां साफ संकेत देती हैं कि कई विद्यालय बच्चों की सुरक्षा से अधिक मुनाफे को प्राथमिकता दे रहे हैं। बिना सुरक्षा मानकों के चल रही स्कूल वाहन व्यवस्थाएं किसी भी दुर्घटना की स्थिति में भयावह रूप ले सकती हैं।

स्थानीय नागरिकों एवं अभिभावकों ने मांग की है कि:

परिवहन विभाग पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर अभियान चलाए।

नियम तोड़ने वाले विद्यालयों पर कड़ी कार्रवाई हो।

जिस वाहन में खामी मिले, तत्काल उसका परमिट निलंबित किया जाए।

बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वालों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हों।

बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि — नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई जरूरी

निरीक्षण में सामने आई लापरवाही ने यह साबित कर दिया है कि कई स्कूल प्रशासन सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बच्चों के जीवन को खतरे में डाल रहे हैं। जिले में की गई यह कार्रवाई प्रदेशभर में स्कूल वाहन सुरक्षा को लेकर बड़ा संदेश देती है।

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