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माहेश्वरी समाज की राजनीति का सबसे रोचक चुनाव, मामा-भांजा फैक्टर बना चर्चा का केंद्र

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 श्री अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के पूर्व अध्यक्ष श्याम सुन्दर बिडला और श्री अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा के समर्थित पैनल आमने-सामने, पूरे समाज की निगाहें 21 जून पर

   🖋  तेजाराम लाडणवा
मेड़ता सिटी (नागौर)

मेड़ता तहसील माहेश्वरी सभा के 31वें सत्र के चुनाव को लेकर माहेश्वरी समाज में सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। समाज के जानकारों का मानना है कि यह केवल तहसील स्तर का चुनाव नहीं बल्कि माहेश्वरी समाज की व्यापक सामाजिक और संगठनात्मक राजनीति का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यही कारण है कि नागौर जिले से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक इस चुनाव की चर्चा हो रही है।
माहेश्वरी समाज के राष्ट्रीय चुनावों में भी नागौर जिले की भूमिका हमेशा प्रभावशाली रही है।  नागौर क्षेत्र के समाजजन राष्ट्रीय स्तर के निर्णयों में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाते रहे हैं। यही वजह है कि मेड़ता तहसील माहेश्वरी सभा के चुनाव को भी पूरे समाज में विशेष महत्व दिया जा रहा है।
इस बार मुकाबला दो प्रभावशाली गुटों के बीच माना जा रहा है। एक ओर अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के पूर्व अध्यक्ष श्याम सुंदर बिड़ला का प्रभाव दिखाई दे रहा है, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व करते हुए समाज में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। संघ की विचारधारा से जुड़े रहे श्याम सुंदर बिड़ला विभिन्न सामाजिक एवं संगठनात्मक दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं और आज भी समाज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
वहीं दूसरी ओर अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के वर्तमान  अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा हैं, जिनकी पहचान केवल समाज तक सीमित नहीं है। वे भारतीय जनता पार्टी में राजस्थान प्रदेश कोषाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन कर चुके हैं, गांव के सरपंच भी रह चुके हैं और राजनीतिक तथा सामाजिक क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। भाजपा और सामाजिक संगठनों में उनकी सक्रियता के कारण उनका प्रभाव व्यापक माना जाता है।

मैदान में उतरा श्याम सुंदर बिड़ला समर्थित पैनल
श्याम सुंदर बिड़ला समर्थित पैनल में अध्यक्ष पद के लिए राजेंद्र बंग, उपाध्यक्ष पद के लिए मुकेश गट्टाणी, सचिव पद के लिए किशन गोपाल लाहोटी, कोषाध्यक्ष पद के लिए महावीर प्रसाद कोठारी (मेड़ता रोड), संगठन सचिव पद के लिए ऋषभ राठी (गोटन) तथा सह सचिव पद के लिए नटवर काबरा (पादूकलां) को मैदान में उतारा गया है।
लाम्पोलाई स्थित श्याम बाबा मंदिर से इस पैनल ने चुनावी जनसंपर्क अभियान की शुरुआत कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।
रामकुमार भूतड़ा समर्थित पैनल ने भी खोले पत्ते
इसके बाद वर्तमान अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा समर्थित पैनल ने भी अपनी टीम की घोषणा कर चुनाव को सीधा मुकाबला बना दिया। इस पैनल में अध्यक्ष पद के लिए घनश्याम डालियां (मेड़ता), उपाध्यक्ष पद के लिए कैलाशचंद मूंदड़ा (जसनगर), सचिव पद के लिए कैलाशचंद बंग (रेन), सह सचिव पद के लिए अनिल कुमार बाहेती (रियाबड़ी), कोषाध्यक्ष पद के लिए महावीर प्रसाद कोठारी (मेड़ता रोड) तथा संगठन मंत्री पद के लिए ऋषभ राठी (गोटन) को आगे किया गया है।
आखिर किसके हैं मामा-भांजा?
इस चुनाव का सबसे रोचक पहलू यह है कि दोनों गुटों के बीच चल रही चर्चा के केंद्र में महावीर प्रसाद कोठारी मेडतारोड (ढावा वाले)और ऋषभ राठी की गोटन (खारिया वाले) मामा-भांजा जोड़ी है। समाज के लोग खुले तौर पर चर्चा कर रहे हैं कि दोनों गुटों द्वारा इस जोड़ी को महत्व दिए जाने के बाद अब यह समझना मुश्किल हो गया है कि मामा-भांजा का वास्तविक झुकाव किस ओर माना जाए।
समाज की बैठकों, चाय की थड़ियों, सोशल मीडिया समूहों और जनसंपर्क कार्यक्रमों में एक ही सवाल सुनाई दे रहा है— “मामा-भांजा आखिर किस खेमे के हैं?” हालांकि दोनों ही गुटों द्वारा समाजजनों से अपील की जा रही है कि इस जोड़ी को समर्थन और आशीर्वाद देकर विजयी बनाया जाए।
चुनाव का ‘निर्णायक फैक्टर’ बन सकती है जोड़ी
समाज के वरिष्ठ लोगों का मानना है कि चुनाव परिणाम चाहे किसी भी गुट के पक्ष में जाएं, लेकिन मामा-भांजा की यह जोड़ी नई कार्यकारिणी में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। यही कारण है कि दोनों पक्ष इस जोड़ी को अपने साथ जोड़कर देखने का प्रयास कर रहे हैं।
कई समाजजन तो यहां तक कह रहे हैं कि इस बार अध्यक्ष कौन बनेगा, सचिव कौन बनेगा, इससे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि मामा-भांजा फैक्टर किस दिशा में प्रभाव डालेगा।
73 सदस्य करेंगे फैसला
21 जून को भंवाल स्थित भुवाल माता जन सेवा ट्रस्ट परिसर में होने वाली चयन प्रक्रिया में 71 कार्यमंडल सदस्य और 2 पदेन सदस्य सहित कुल 73 सदस्य नई कार्यकारिणी का चयन करेंगे।
अब पूरे माहेश्वरी समाज की नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि राष्ट्रीय स्तर के दो प्रभावशाली नेतृत्वों के समर्थन वाले इन पैनलों में से किसे बहुमत मिलता है और चुनाव के सबसे चर्चित चेहरे बने मामा-भांजा आखिर किसके लिए विजयश्री का मार्ग प्रशस्त करते हैं। फिलहाल समाज में यही चर्चा है कि इस बार चुनाव का असली आकर्षण पद नहीं, बल्कि मामा-भांजा फैक्टर बन चुका है।

ऋषभ राठी
महावीर प्रसाद कोठारी

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