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सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा भक्ति के साथ समापन। समापन पर भंडारे का आयोजन हजारों लोगों नेपाई पंगत प्रसादी।

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फुलेरा (दामोदरकुमावत) कस्बे की ढाणी नागान स्थित शिवालय चौक में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन बुधवार को भक्ति, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। सात दिनों तक चले इस आध्यात्मिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र को धर्ममय वातावरण से ओत-प्रोत कर दिया। इस भव्य आयोजन के मुख्य यजमान एवं प्रमुख प्रेरक के रूप में गौरीशंकर शर्मा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

धार्मिक आस्था, सेवा भाव और व्यवस्थागत कुशलता के साथ उन्होंने संपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई। उनके साथ यजमान के रूप में मीना शर्मा ने भी निरंतर सहयोग प्रदान किया। श्रद्धालुओं ने गौरीशंकर शर्मा के योगदान की मुक्त कंठ से सराहना की।
कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित एवं राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया।

इसके साथ ही पंचकुंडीय यज्ञ का आयोजन हुआ, जिसमें 11 जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां अर्पित कर हवन की पूर्णाहुति एवं महाविश्राम संपन्न कराया।
वृंदावन धाम से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक पंडित दिलखुश नागदा महाराज ने अपनी ओजस्वी और भावप्रवण वाणी में कथा का समापन किया। उन्होंने सुदामा–कृष्ण मित्रता के माध्यम से निष्काम भक्ति और सच्चे प्रेम का संदेश दिया। इस अवसर पर महंत त्रिलोकी दास महाराज ने श्रीमद्भागवत पुराण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह ग्रंथ मानव जीवन को धर्म, भक्ति और सदाचार की दिशा प्रदान करता है।

कार्यक्रम के संचालन में पंडित प्रभा दुबे, पंडित अभय तिवाड़ी एवं पंडित अभिषेक मिश्रा का सराहनीय योगदान रहा। समापन अवसर पर विधिवत महाआरती के पश्चात विशाल महाप्रसाद भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस पावन अवसर पर अभिषेक, अंजली शर्मा, मयंक शर्मा, कौटिल्य, नेहा, शंकर सहाय, संतोष शर्मा, महेश सहाय, सुधा, सुनील, राधा, पूनम, डिंपल, सोनू, महिमा, लालचंद, अनिल दंभीवाल, पवन कुमार, हरीश शर्मा, ब्रजमोहन, केशव यादव सहित अनेक श्रद्धालु एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। इस दौरान समाजसेवी पवन कुमार द्वारा श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत गीता भेंट कर धार्मिक चेतना को और अधिक सुदृढ़ किया गया। समग्र रूप से यह सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा आयोजन ढाणी नागान क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक जागरण, सामाजिक एकता और धार्मिक समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर संपन्न हुआ।

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