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मेड़ता की व्यापारिक, सामाजिक और धार्मिक पहचान के स्तंभ:हनुमान प्रसाद गोयल ‘मामा जी’ से संजय कुमार अग्रवाल तक एक प्रेरक यात्रा

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हनुमान प्रसाद जी गोयल उर्फ मामा जी सुजानगढ़ वाले मेड़ता सिटी
समाजसेवी संजय कुमार अग्रवाल मेड़ता सिटी


🖊 तेजाराम लाडणवा
शेखावाटी अंचल के निवासी हनुमान प्रसाद गोयल का जीवन संघर्ष, पुरुषार्थ और सेवा की अद्भुत मिसाल है। अल्पायु में ही माता-पिता का साया उठ जाने के बाद वे अपने जीजाजी सीताराम मित्तल के पास मेड़ता आए। यही नगरी आगे चलकर उनकी कर्मभूमि बनी, पहचान बनी और सम्मान का पर्याय बनी।
मेड़ता में ही शिक्षा ग्रहण कर हनुमान प्रसाद गोयल ने अनाज व्यापार से अपने व्यवसायिक जीवन की शुरुआत की। व्यापार में ईमानदारी, सटीक बोली-चाल और व्यवहारिक कुशलता के चलते वे शीघ्र ही सफल होते चले गए। लक्ष्मणगढ़ निवासी गीता देवी के साथ विवाह के पश्चात व्यापार ने नई ऊँचाइयों को छुआ और वे मेड़ता में स्नेहपूर्वक ‘मामा जी’ के नाम से प्रसिद्ध हो गए—यहाँ शायद ही कोई व्यक्ति हो जो उन्हें इस नाम से न जानता हो।
धर्म, सेवा और गौसेवा में अग्रणी ‘मामा जी’
हनुमान प्रसाद गोयल न केवल एक सफल व्यापारी थे, बल्कि सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में भी सदैव अग्रणी रहे। उन्होंने पिंजरा पोल गौशाला में लंबे समय तक अध्यक्ष पद पर रहकर गौसेवा की, आर्य समाज से सक्रिय रूप से जुड़े रहे और धार्मिक आयोजनों में सदैव अग्नि-भूमिका निभाई। उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा रहा।
उत्तराधिकार नहीं, उत्तरदायित्व निभाने वाले संजय कुमार अग्रवाल
हनुमान प्रसाद गोयल के सबसे बड़े पुत्र संजय कुमार अग्रवाल का जन्म वर्ष 1970 में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने कम उम्र में ही पिता के साथ व्यापार संभाल लिया और गोयल किराना स्टोर की नींव रखी, जो आज भी मेड़ता के प्रतिष्ठित किराना व्यवसायों में गिना जाता है।
गोयल किराना स्टोर का वर्तमान संचालन छोटे पुत्र वेद प्रकाश अग्रवाल कर रहे हैं, जिनके साथ भारत उर्फ बबलू कंधे से कंधा मिलाकर व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं।
एजेंसी व्यापार में जिले-भर में पहचान
संजय कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में गोयंका सैल्स एजेंसी के नाम से एफएमसीजी, गुटखा, किराना एवं मनिहारी का होलसेल व्यापार प्रारंभ हुआ, जिसने न केवल मेड़ता बल्कि पूरे नागौर जिला में अपनी अलग और सशक्त पहचान बनाई।
आज दर्जनों प्रतिष्ठित कंपनियों की एजेंसियाँ उनके पास हैं और उनकी फर्म का नाम जिले के बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों में सम्मान के साथ लिया जाता है।
तीसरी पीढ़ी भी पूरी निष्ठा से सक्रिय
संजय कुमार अग्रवाल के बड़े पुत्र मधुसूदन अग्रवाल (इंजीनियर) एवं छोटे पुत्र मनीष अग्रवाल (स्नातक) ने भी पिता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर व्यापार संभाल लिया है। पहले जहाँ कार्यक्षेत्र मेड़ता व तहसील तक सीमित था, वहीं आज उनकी फर्म का प्रभाव पूरे नागौर जिले तक फैला हुआ है।
परिवार के छोटे भाई ओमप्रकाश उर्फ लालजी अग्रवाल ने बाबा एजेंसी के माध्यम से मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में भी अपनी सशक्त पहचान स्थापित की है।
समाज सेवा और नेतृत्व का पर्याय
संजय कुमार अग्रवाल बचपन से ही चंचल, मिलनसार और सेवाभावी रहे हैं। वे अग्रवाल नवयुग मंडल के अध्यक्ष पद पर लगभग 10 वर्षों तक रहकर समाज की सेवा कर चुके हैं। वर्तमान में वे अग्रवाल समाज में मंत्री पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
इसके साथ ही वे मेड़ता की सार्वजनिक हिंदू धर्मशाला के ट्रस्टी भी हैं और हाल ही में कुछ साथियों के साथ मिलकर प्रभु जी नागर की भागवत कथा का भव्य आयोजन कर मेड़ता शहर के धार्मिक इतिहास में एक स्मरणीय अध्याय जोड़ा।
अनुशासित दिनचर्या, सरल जीवन
संजय कुमार अग्रवाल की दिनचर्या स्वयं में प्रेरणास्पद है—सुबह 4 बजे उठना और सायं 7 बजे विश्राम। मधुर वाणी, गरीबों की भावनाओं की समझ और निष्पक्ष व्यवहार के कारण वे बड़े-छोटे सभी व्यापारियों के बीच समान रूप से सम्मानित हैं।
हनुमान प्रसाद गोयल ‘मामा जी’ द्वारा बोया गया ईमानदारी, सेवा और धर्म का बीज आज संजय कुमार अग्रवाल और उनकी अगली पीढ़ी द्वारा एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। व्यापार, समाजसेवा और धार्मिक चेतना—तीनों क्षेत्रों में यह परिवार आज मेड़ता और नागौर जिले की एक सशक्त पहचान बन चुका है।

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