
भक्ति का अमृत सागर उमड़ा, प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आगाज
फुलेरा (दामोदर कुमावत)
देवी देवताओं की नानी यानी देवयानी, एवं शक्तिपीठ मां शाकंभरी की पावन धरा पर, जहां अरावली की गोद में बसी सांभर झील सदियों से आस्था और प्रकृति का संगम रही है, वहां आज एक दिव्य पुंज प्रकाशित हुआ। प्राचीन सांभर झील के तट पर स्थित नवनिर्मित व भव्य श्री श्याम मंदिर में भगवान बर्बरीक श्याम प्रभु की दिव्य मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का पांच दिवसीय महोत्सव भव्यता के साथ प्रारंभ हो गया।

यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति की अनंत धारा का प्रतीक है, जो महाभारत काल के वीर बर्बरीक—जिन्हें श्रीकृष्ण स्वयं ने ‘श्याम’ नाम से विभूषित किया—की अमर गाथा को जीवंत करता है। बर्बरीक का शीशदान, जो महाभारत युद्ध के साक्षी बना, आज भी श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति की ज्योति जलाता है।

इसी पावन परंपरा को समर्पित होकर श्याम रंगीला परिवार सेवा समिति ने इस ऐतिहासिक कलश यात्रा का आयोजन किया, कलश यात्रा का दिव्य स्वरूप: 2100 कलशों का अमृत प्रवाह आज, 12 नवंबर 2025 को, गट्टानी गार्डन बस स्टैंड से प्रारंभ हुई यह विशाल कलश यात्रा एक जीवंत भक्ति चित्रण बनकर उभरी। 2100 पवित्र महिलाओं ने सर पर कलश धारण कर, मंगल गानो के साथ यात्रा में भाग लिया, जो नारी शक्ति और श्याम भक्ति का प्रतीक रहा। विधायक स्वामी बालमुकुंदाचार्य जी के पावन सान्निध्य में यह यात्रा श्री श्याम मंदिर परिसर पहुंची, जहां हजारों श्रद्धालुओं का विशाल जनसमूह जयकारों से गुंजायमान था।

जगह-जगह पुष्प वर्षा, आरती और भजन-कीर्तनों से यात्रा का स्वागत किया गया, मानो स्वर्ग से फूल बरस रहे हों। यात्रा में भगवान शिव माता काली भैरव हनुमान जी सहित देवी देवताओं की जीवंत झांकियां जिन्होंने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने पर मजबूर कर दिया। सर्व समाज के श्रद्धालु एवं भक्तों ने इसमें भाग लेकर इसे एकता और समरसता का प्रतीक बना दिया—यह यात्रा न केवल सांभर की, बल्कि पूरे राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करने वाली साबित हुई।सांभर झील,जो विश्व प्रसिद्ध खारे पानी की झील के रूप में जानी जाती है, जो सदियों से आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र रहा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह क्षेत्र महाभारत काल से जुड़ा है, जहां देवयानी तीर्थ और शाकंभरी देवी मंदिर जैसे पावन स्थल भक्ति की जड़ें मजबूत करते हैं।

इसी पावन भूमि पर श्याम प्रभु का मंदिर स्थापित होना, भगवान बर्बरीक की कथा को साकार करता है—जिसने अपना शीश दान कर धर्म की रक्षा का संकल्प लिया था। यह कलश यात्रा उसी अमर त्याग की स्मृति को ताजा करती है।
पांच दिवसीय महोत्सव: यज्ञ, भजन और संतों का आगमन
इस कलश यात्रा के साथ ही पांच दिवसीय मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ हुआ, जो 16 नवंबर को चरम पर पहुंचेगा। प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं: 11 कुंडीय महायज्ञ: वेद मंत्रों की ध्वनि और हवन की सुगंध से परिसर गुंफित रहेगा। यह यज्ञ भगवान श्याम की कृपा प्राप्ति के लिए समर्पित है, जहां आहुतियां धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का संदेश देंगी।
16 तारीख को प्राण प्रतिष्ठा: भगवान श्याम प्रभु अपनी नवस्थापित भव्य मूर्ति में विराजमान होंगे। यह क्षण सांभर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से अंकित होगा, जहां मंत्रों की गूंज और घंटाध्वनियों से आकाश गूंज उठेगा।प्रमुख संत-महात्माओं का आगमन: देश-विदेश के प्रसिद्ध संतों की उपस्थिति से यह स्थान भक्ति का केंद्र बनेगा। उनकी वाणी और आशीर्वाद श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करेंगे।भजन गायकों का दिव्य संगीत: प्रसिद्ध भजन गायक ‘श्याम रंगीला’ भजनों की वर्षा करेंगे, जैसे “श्याम रंगीला, मोहन रंगीला” और “बर्बरीक श्याम, कृपा करो रे”। ये भजन हृदय को स्पर्श करेंगे, मानो स्वयं बाबा श्याम की लीला हो रही हो।
यह महोत्सव सांभर झील को धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनाने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा। झील का प्राकृतिक सौंदर्य—जहां फ्लेमिंगो पक्षियों का झुंड और चमचमाती नमक की परतें स्वर्गीय दृश्य रचती हैं—भक्ति के साथ मिलकर एक अद्भुत अनुभव देगा।

Author: aapnocitynews@gmai.com





