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रेलवे गार्ड्स का जोरदार धरना: देशभर में गूंजा ट्रेन मैनेजर्स का रोष, मांगें पूरी न हुईं तो आंदोलन तेज!

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फुलेरा (दामोदर कुमावत) – भारतीय रेलवे की रफ्तार को सुचारू रखने वाले ट्रेन मैनेजर्स (रेलवे गार्ड्स) अब सड़कों पर उतर आए हैं! वर्षों से लटकी मांगों को लेकर ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल ने बुधवार को देशभर में मंडल रेल प्रबंधक कार्यालयों के सामने ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन किया। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस धरने ने रेलवे बोर्ड की नीतियों पर सवालों की बौछार कर दी। फुलेरा से लेकर दिल्ली तक, हजारों गार्ड्स ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की, जो रेलवे के ‘भेदभावपूर्ण व्यवहार’ के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।


गंभीर आरोप: वेतन-भत्तों में अन्याय, पदोन्नति पर सेंध!
ट्रेन मैनेजर्स का गुस्सा रेलवे बोर्ड की ‘अन्यायपूर्ण’ नीतियों पर केंद्रित है। संगठन के अनुसार, तीसरे और चौथे वेतन आयोग में ट्रेन मैनेजर्स के वेतनमान समकक्ष पदों के बराबर थे, लेकिन आज वे उनसे कहीं पीछे रह गए हैं। पदोन्नति के अवसरों में भी भेदभाव साफ नजर आता है। सबसे ताजा मुद्दा रनिंग भत्ते (केएमए) का है – 1 जनवरी 2024 से डीए 50% से अधिक होने पर यात्रा भत्ते सहित अन्य भत्तों में 25% वृद्धि कर दी गई, लेकिन ट्रेन मैनेजर्स को मिलने वाले रनिंग भत्ते पर यह लाभ लागू नहीं हुआ। बार-बार पत्राचार और अपील के बावजूद अनदेखी से गार्ड्स में भयंकर असंतोष फैल गया है।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम रेल की जान होते हैं, लेकिन हमें दूर व्यवहार मिल रहा है!”देशव्यापी धरना: यह धरना संगठन की राष्ट्रीय कार्यसमिति के आह्वान पर एक साथ देशभर के सभी मंडल रेल प्रबंधक कार्यालयों पर आयोजित किया गया। हजारों ट्रेन मैनेजर्स ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की और माननीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नाम ज्ञापन सौंपा।

मुख्य मांगें ऐसी हैं, जो न सिर्फ वेतन न्याय की बात करती हैं, बल्कि रेलवे की कार्य संस्कृति को मजबूत करने का दावा भी:
पदोन्नति में पारदर्शिता: पर्याप्त अवसर प्रदान कर एमएसीपी (मॉडिफाइड अस्यॉर्ड करियर प्रोग्रेशन) लागू करें।भत्ता वृद्धि: रनिंग भत्ते में भी अन्य भत्तों की तरह 25% तत्काल वृद्धि करें।
रिक्त पद भरें: ट्रेन मैनेजर्स के खाली पदों की तुरंत भर्ती करें।
पुरानी पेंशन बहाल: 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती रेलकर्मियों के लिए एनपीएस और यूपीएस रद्द कर पुरानी पेंशन का लाभ दें।
ये मांगें अगर पूरी नहीं हुईं, तो संगठन ने और कड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
जयपुर मंडल के सैकड़ों गार्ड्स ने दिखाया एकजुटता का दम
जयपुर मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के सामने धरना स्थल पर जोनल सचिव गजेन्द्र प्रसाद मीणा के नेतृत्व में मंडल अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह यादव, मंडल सचिव हरि प्रसाद प्रजापत, सेवानन्द प्रसाद, बाबूलाल मीणा, रामसिंह मीणा, देवेन्द्र शर्मा, एम एस चौहान, राजेश सैनी, मनीष शर्मा, हमीर सिंह, एच के मीणा, गणेश नारायण यादव, किरोड़ी मीणा, राजेश सहगल, रामावतार मीणा, शीशराम गुर्जर, राधाकृष्णन मीणा, सुशील कुमार, प्रितेश कुमार सहित जयपुर, फुलेरा, बांदीकुई और रेवाड़ी से सैकड़ों ट्रेन मैनेजर्स पहुंचे। नारे लगे – “ट्रेन मैनेजर्स की मांगें, न्याय दो अन्याय छोड़ो!” – और बैनर-पोस्टरों से सजी सभा ने मंडल रेल प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा। एक गार्ड ने बताया, “हमारी मेहनत रेल को गति देती है, लेकिन बोर्ड की उदासीनता हमें थका रही है।”
यह धरना न सिर्फ ट्रेन मैनेजर्स की लड़ाई है, बल्कि रेलवे कर्मचारियों के व्यापक संघर्ष का प्रतीक बन गया है। क्या रेल मंत्रालय इन मांगों पर तुरंत कार्रवाई करेगा? आने वाले दिन बताएंगे। रेलवे बोर्ड की प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन गार्ड्स का संकल्प अटल है –

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