
दया जीन्हो के दिल नहीं बहुर कहावे साध, जे मुख उनका देखिए तो लागे बहु अपराध.
…: संत रामप्रकाश स्वामी
फुलेरा (दामोदर कुमावत)
कस्बे के श्री राम नगर स्थित दादू आश्रम पर श्री चातुर्मास सत्संग ज्ञान यज्ञ समारोह में सोमवार को श्रीमद् दादू वाणी एवं भक्तमाल कथा के दौरान बड़ी संख्या में पधारे नर नारी श्रद्धालुओं को आश्रम महंत संगीताचार्य संत रामप्रकाश स्वामी ने प्रवचन के दौरान बताया कि ‘दया जीन्हो के दिल नहीं,

बहुर कहावे साध जे मुख उनका देखिए, तो लागे बहू अपराध अर्थात उन्होंने बताया कि महान संत दादू दयाल महाराज ने कहा कि , प्राणी मात्र के हृदय में यदि दया और पुरुषार्थ नहीं है, वह पुरुष मानवीय गुणों से युक्त साधक नहीं कहला सकता। ऐसे पुरुष को देखना भी दोष माना जाता है। वह आध्यात्मिक दृष्टि से अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए कहा गया है प्राणी के हृदय में दया भाव होना चाहिए।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को आवाहन किया कि जीवन में श्रीमद् दादू वाणी का अनुसरण करने वाला प्राणी का कल्याण सुनिश्चित है। हमें सत्मार्ग, सत्य धर्म और कर्म करते हुए परमपिता परमेश्वर को याद रखना चाहिए जिससे हमारा जीवन सफल होगा।

दादू आश्रम प्रबंधक धर्मदास स्वामी ने बताया कि श्री दादू वाणी एवं भक्तमाल कथा प्रवचन से पूर्व महंत राम प्रकाश स्वामी के सानिध्य में ज्ञान यज्ञ में पूर्ण आहूती दी गई तथा क्षेत्र में सुख संपत्ति और खुशहाली की कामना की गई । आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया इस अवसर पर श्रद्धालु भक्तों सहित दर्जनों नर नारी उपस्थित रहे।

Author: Aapno City News




