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खानिया जी अतिशय क्षेत्र में आचार्य वर्धमान सागर जी का भव्य मंगल प्रवेश1969 में 1008 चंद्रप्रभ भगवान के समक्ष शांति भक्ति से लौटी थी नेत्र ज्योति

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जयपुर,  उपसर्ग निवारण स्थल खानिया जी अतिशय क्षेत्र में पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का शुक्रवार को 34 साधुओं के संघ सहित भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर राणा जी नसिया के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर मंगल आरती के साथ उनका श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ आचार्य संघ का अभिनंदन किया।
मंगल प्रवेश के बाद आचार्य श्री ने मान स्तंभ के दर्शन किए तथा मूलनायक श्री वासुपूज्य भगवान के अभिषेक का दर्शन किया। इसके पश्चात मंदिर की विभिन्न वेदियों पर विराजित भगवानों के दर्शन कर धर्मसभा को संबोधित किया।
धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने खानिया जी अतिशय क्षेत्र की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि 24 तीर्थंकरों में पांच भगवान बाल ब्रह्मचारी हुए हैं। जयपुर में सैकड़ों जिनालय बने हुए हैं, लेकिन खानिया जी का यह जिनालय अनेक अतिशयों के कारण विशेष महत्व रखता है।
आचार्य श्री ने अपने जीवन का एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि वर्ष 1969 में दीक्षा के चार माह बाद उनकी नेत्र ज्योति चली गई थी। उस समय उन्होंने इसी जिनालय में 1008 श्री चंद्रप्रभ भगवान के समक्ष शांति भक्ति का पाठ किया, जिसके बाद उनकी नेत्र ज्योति पुनः लौट आई। यह प्रसंग सुनकर उपस्थित साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने भगवान चंद्रप्रभ और आचार्य श्री के जयकारों से वातावरण गुंजायमान कर दिया।
उन्होंने बताया कि प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी महाराज ने खानिया जी में तीन चातुर्मास किए थे और उन्हें आचार्य पद भी यहीं प्राप्त हुआ था। उनकी समाधि भी खानिया जी में ही हुई। वहीं द्वितीय पट्टाचार्य श्री शिवसागर जी महाराज को भी आचार्य पद इसी पवित्र स्थल पर प्राप्त हुआ था।
राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने कहा कि यह स्थान अनेक साधुओं की दीक्षा स्थली भी रहा है। आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर जी महाराज ने भी मूलनायक श्री वासुपूज्य भगवान के समक्ष आचार्य पद का त्याग यहीं किया था। यहां भगवान की प्रतिमा तीन बार चोरी होने के बावजूद पुनः प्राप्त होना भी इस क्षेत्र के अतिशय का प्रमाण माना जाता है।
इस अवसर पर मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज ने भी अपने प्रवचन दिए। कार्यक्रम का संचालन कमल बाबू ने किया। आचार्य संघ का यहां कुछ दिनों तक अल्प प्रवास रहेगा।

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