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मेड़ता जिला बार चुनाव में कांग्रेस समर्थक अधिवक्ताओं का दबदबा,

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मेड़ता जिला बार एसोसिएशन चुनाव: उलटफेर, इतिहास और सियासी संदेश

पिछले वर्ष हारे पुरखाराम भवरिया इस बार 8 मतों से बने अध्यक्ष

मेड़ता जिला बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारी
मेड़ता बार एसोसिएशन के चुनाव में सबसे अधिक मतों से जीते सुरेश चौधरी

मेड़ता सिटी तेजाराम लाडणवस

मेड़ता जिला बार एसोसिएशन के चुनाव इस बार सिर्फ पदों की जीत-हार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने इतिहास, बदले समीकरण और सियासी संदेश भी साफ-साफ दे दिया। सबसे बड़ा और रोचक मुकाबला अध्यक्ष पद पर देखने को मिला, जहां नागौर जिला परिषद सदस्य एडवोकेट पुरखाराम भवरिया ने 8 मतों के अंतर से शानदार जीत दर्ज कर अध्यक्ष पद अपने नाम किया।

यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि गत वर्ष हुए चुनाव में पुरखाराम भवरिया मात्र 13 मतो से अध्यक्ष पद से चूक गए थे। उस हार के बाद इस बार उन्होंने पूरी रणनीति, संगठन और संपर्क के साथ चुनाव लड़ा और अंततः जीत दर्ज कर पुरानी हार का हिसाब बराबर कर दिया

अध्यक्ष पद पर पांच उम्मीदवार, कांटे की टक्कर

अध्यक्ष पद के लिए कुल पांच उम्मीदवार मैदान में थे। मतगणना में पुरखाराम भवरिया को 98 मत, रुस्तम अली प्रिंस को 90 मत, जगदीश पार्षद को 62 मत, धर्मेंद्र चौधरी को 12 मत तथा ओमप्रकाश बाता को 8 मत प्राप्त हुए। इस पद पर एक मत खारिज भी हुआ।
कुल 323 मतदाताओं में से 274 अधिवक्ताओं ने मतदान किया, जो चुनाव के प्रति अधिवक्ताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।

मेड़ता जिला बार संघ के  चुनाव में इस बार कांग्रेस समर्थक अधिवक्ताओं का स्पष्ट दबदबा देखने को मिला।

  • उपाध्यक्ष पद पर अजय जावा ने 158 मत प्राप्त कर सुरेश दाधिच (114 मत) को 44 मतों से पराजित किया।
  • महासचिव पद पर सुरेश चौधरी ने 178 मत प्राप्त कर नेमाराम भाकर को 83 मतों से हराकर रिकॉर्ड जीत दर्ज की। यह जीत चुनाव की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है।
  • सह सचिव पद पर रामकिशोर सोनी ने 157 मत प्राप्त कर अहमद राजा को 44 मतों से पराजित किया।
  • कोषाध्यक्ष पद पर आशीष राजपुरोहित ने 154 मत लेकर मनीषा दीवाकर (119 मत) को 35 मतों से हराया
  • पुस्तकालय सचिव पद पर रविंद्र प्रजापति पहले ही निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके थे।

भाजपा समर्थकों की रणनीति कमजोर, पकड़ नहीं बना पाए

चुनाव परिणामों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी समर्थक अधिवक्ता इस बार  एसोसिएशन में अपनी पकड़ मजबूत नहीं बना पाए। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पुस्तकालय सचिन जैसे प्रमुख पदों पर कांग्रेस समर्थक अधिवक्ताओं की जीत ने संगठन के अंदर बदलते समीकरणों को उजागर कर दिया।

खारिज मत बने चर्चा का विषय

चुनाव में विभिन्न पदों पर कई मतों का खारिज होना एक गंभीर और चिंताजनक पहलू बनकर सामने आया। पढ़े-लिखे, बुद्धिजीवी और अधिवक्ताओं के इस चुनाव में मतों का खारिज होना मतदान की गंभीरता और जागरूकता पर सवाल खड़े करता है। इसे लेकर शहर में चर्चाएं हो रही है

निष्कर्ष

मेड़ता जिला बार एसोसिएशन का यह चुनाव केवल एक संगठनात्मक चुनाव नहीं, बल्कि पुरानी हार से वापसी, सियासी संतुलन में बदलाव और अधिवक्ताओं की नई सोच का आईना बनकर सामने आया है।
अधिवक्ता पुरखाराम भवरिया की जीत ने यह साबित कर दिया कि संघर्ष, धैर्य और रणनीति से हार को भी जीत में बदला जा सकता है

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