

नागौर
रेगिस्तानी अंचल के एक छोटे से गांव में प्रेम की ऐसी कहानी सामने आई जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया। दो युवकों के बीच परवान चढ़े प्रेम ने सामा
जिक बंदिशों को चुनौती दी—और एक ने दुल्हन का रूप धरकर दूसरे के घर बहू बनकर प्रवेश कर लिया।
दिल से दिल तक: जब मोहब्बत ने लांघीं सरहदें
बताया जा रहा है कि दोनों युवकों की पहचान दोस्ती से शुरू हुई और रिश्ता धीरे-धीरे प्रेम में बदल गया। समाज की परवाह किए बिना साथ जीने-मरने की कसमें खाईं। परिवार, जो दहेज और शादी के भारी खर्चों से चिंतित था, अचानक “बिना खर्च की दुल्हन” पाकर खुश हो उठा। मिठाइयां बंटी, ढोल बजे, और नए रिश्ते का स्वागत हुआ।
परफेक्ट बहू का किरदार
लाल जोड़े, साड़ी, चूड़ियां, बिंदी और बदली हुई आवाज—दुल्हन इतनी स्वाभाविक लगी कि किसी को संदेह न हुआ।
सुबह जल्दी उठकर घर के कामकाज, सास-ससुर के चरण स्पर्श, रोटियां बनाना, आंगन बुहारना—हर भूमिका बखूबी निभाई गई।
सामाजिक कार्यक्रमों में ‘पति’ संग डांस, सोशल मीडिया पर रील्स, हंसी-खुशी का माहौल—गांव में चर्चा थी कि बहू बड़ी सुशील और संस्कारी है।
शक की सुई और खुला राज
कुछ दिनों बाद गांव की महिलाओं को हाव-भाव और व्यवहार पर हल्का संदेह हुआ। जांच-पड़ताल में सच्चाई सामने आई कि कथित बहू वास्तव में युवक है। सूचना पर पुलिस पहुंची और दोनों को थाने ले जाकर पूछताछ की। फिलहाल मामला प्रेम संबंध का बताया जा रहा है, किसी पक्ष ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई।
सवालों के घेरे में समाज
घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए—
क्या प्रेम में लिंग की पहचान सबसे ऊपर है?
क्या ग्रामीण समाज में समलैंगिक रिश्तों के लिए जगह बन पाएगी?
या सामाजिक दबाव ऐसे रिश्तों को छुपकर जीने पर मजबूर करता रहेगा?
यह घटना जहां एक ओर प्रेम की हिम्मत दिखाती है, वहीं दूसरी ओर धोखे और सामाजिक स्वीकार्यता की सीमाओं पर भी बहस छेड़ती है।
नागौर का यह किस्सा अब गांव की चौपाल से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

Author: aapnocitynews@gmai.com




