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जेल में बंद विचाराधीनों को राहत की दिशा में बड़ा कदममेड़ता में यूटीआरसी बैठक व “मध्यस्थता 2.0” अभियान पर हुई अहम वर्चुअल चर्चा

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मेड़ता सिटी  )तेजाराम लाडणवा)
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जेलों में निरुद्ध विचाराधीन बंदियों के मामलों की समीक्षा हेतु अंडर ट्रॉयल रिव्यू कमेटी (यूटीआरसी) की त्रैमासिक वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया।

बैठक की अध्यक्षता अरुण कुमार बेरीवाल, अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मेड़ता (जिला एवं सत्र न्यायाधीश) ने की।
बैठक में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मेड़ता स्वाति शर्मा, जिला कलेक्टर नागौर अरुण कुमार पुरोहित, जिला पुलिस अधीक्षक नागौर मृदुल कच्छावा एवं जेल उपअधीक्षक नागौर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थित रहे।

इस दौरान दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 436-ए एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 479 की परिधि में आने वाले बंदियों, जमानत स्वीकृत होने के बावजूद मुचलका प्रस्तुत न कर पाने वाले बंदियों, शमनीय अपराधों में निरुद्ध बंदियों, परीवीक्षा अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत पात्र बंदियों, अधिकतम दो वर्ष तक की सजा वाले विचाराधीन, रेमिशन के पात्र दण्डित बंदियों, गंभीर बीमारी से ग्रसित बंदियों, महिला बंदियों, विकृतचित्त बंदियों तथा 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के बंदियों के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही कारागारों में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर विचार करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
इसके पश्चात अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मेड़ता अरुण कुमार बेरीवाल की अध्यक्षता में “मध्यस्थता 2.0” अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु मेड़ता न्यायक्षेत्र के न्यायिक अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। बैठक में न्यायाधीश मधुसूदन रॉय (पारिवारिक न्यायालय), सचिव स्वाति शर्मा, अपर सत्र न्यायाधीश दीप्ति श्रीवास्तव, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनीता, न्यायिक मजिस्ट्रेट हुक्मीचंद गहनोलिया, अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिलाष कल्ला सहित अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े।
बैठक के दौरान न्यायालयों में लंबित मध्यस्थता योग्य प्रकरणों को अधिकाधिक संख्या में मध्यस्थता हेतु रैफर कर, आपसी सहमति के माध्यम से त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से अपेक्षा जताई गई कि “मध्यस्थता 2.0” अभियान को जनहित में प्रभावी बनाते हुए न्यायिक प्रक्रिया को सरल, सुलभ और समयबद्ध बनाया जाए।

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