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मेड़ता सिटी (तेजाराम लाडणवा)
मीरा नगरी मेड़ता सिटी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथावाचक संत प्रभुजी नागर ने तुलसीदास, मीरा बाई, नरसी मेहता, कर्मबाई और खाटू श्याम (बरब्रिक) के प्रसंगों के माध्यम से धर्म, आस्था, नीति और भक्ति का गूढ़ संदेश दिया। पंडाल में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी और प्रवचन के दौरान परिसर ‘भक्ति रस’ से सराबोर हो उठा।
प्रभुजी नागर ने कहा कि “तुलसीदास जी का कथन रहणी में ते राद है, वही तारणहार है”, अर्थात भक्ति केवल पूजा और वंदन नहीं बल्कि आचरण, व्यवहार और जीवन शैली है। उन्होंने कहा कि भक्ति में नीति, सेवा और सदाचार का समन्वय आवश्यक है।
‘भारत डमरू का देश है, DJ का नहीं’
कथावाचक ने कहा कि भारत संस्कृति, संगीत, नाद और भक्ति का देश है।
“हमारा भारत डमरू का देश है, DJ का देश नहीं”, इस वाक्य पर श्रद्धालुओं ने तालियों से स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि भक्ति केवल भाव से मिलती है, शोर और प्रदर्शन से नहीं।
‘आँखें बंद करके दान का समय गया’
प्रभुजी ने कहा कि अब समय आंखें बंद करके दान देने का नहीं, बल्कि विवेक के साथ सेवा करने का है।
उन्होंने कहा कि “कलयुग में आंखें खोलकर सेवा करनी चाहिए, क्योंकि सेवा तभी फलित होती है जब उसमें विवेक और धर्म जुड़े हों।”
मीरा की भूमि से भक्ति का संदेश
मीरा बाई की भूमि पर प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि मीरा ने भक्ति में मिठास, विनम्रता और साहस का मार्ग दिखाया।
उन्होंने भजन “पद घुंघरू मीराँ नाची रे” और “संतन के संग लाग रे, तेरी बिगड़ी बनेगी” की प्रस्तुति कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
नरसी मेहता और ‘सांवरिया सेठ’
नरसी मेहता के प्रसंग पर बोले—
“एक भक्त नरसी ने भगवान को सेठ कहा था और आज वही सांवरिया सेठ गली-गली में सेठ बना रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि भगवान के साथ भाव का व्यापार होता है, धन का नहीं।
गौ सेवा और संस्कार का महत्व
प्रभुजी ने गौ सेवा, तुलसी तथा कर्मबाई के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि घर में तिलक, तुलसी, गौ सेवा और माता-पिता की सेवा सात जन्मों का फल देती है।
बरब्रिक का उदाहरण — निर्बल के साथ भगवान
महाभारत के पात्र बरब्रिक का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान हमेशा निर्बल का साथ देते हैं।
उन्होंने कहा कि “धर्म से पहले नीति और नीति से नियम आते हैं, तभी धर्म फलित होता है।”
राष्ट्रपति शब्द पर रोचक टिप्पणी
भाषण में उन्होंने संवैधानिक शब्दावली का उदाहरण देते हुए कहा—
“राष्ट्रपति शब्द किसी स्त्री या पुरुष का नहीं बल्कि संवैधानिक पद का नाम है।”
उन्होंने कहा कि भाषा में भी शुचिता आवश्यक है।
भक्ति में प्रतीक्षा और परिणाम
प्रभुजी नागर ने कहा कि भगवान भक्ति में अधीरता नहीं, प्रतीक्षा और विश्वास देखते हैं।
उन्होंने कहा कि “मीरा की नगरी में भी भगवान को प्रतीक्षा करनी पड़ी।”
पंडाल में भीड़, भक्तिमय वातावरण
कथा के दौरान पंडाल भक्तों से खचाखच भरा रहा। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग पंडाल बनाए गए हैं। आयोजक समिति ने बताया कि प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।
11 जनवरी तक चलेगी कथा
आयोजन समिति के संरक्षक जुगलकिशोर अग्रवाल कैलाश बिंदल राजेश अग्रवाल ने बताया कि कथा 11 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर तक आयोजित की जाएगी और अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से धर्मलाभ लेने की अपील की।

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