

भीलवाड़ा,
राजस्थान के भीलवाड़ा शहर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने चिकित्सा जगत और आमजन को हैरान कर दिया। शहर के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल संचालक और सीनियर डॉक्टर को अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर 90 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि ब्लैकमेलिंग की इस साजिश में डॉक्टर के अपने ही अस्पताल के चार कर्मचारी शामिल निकले। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
दिसंबर 2025 से चल रहा था ब्लैकमेल का खेल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित डॉ. अभिषेक पंवार (44), जो आरसी व्यास कॉलोनी में निवास करते हैं और शहर के पॉश इलाके में अपना निजी अस्पताल संचालित करते हैं, पिछले दो माह से लगातार मानसिक दबाव में थे।
दिसंबर 2025 में उन्हें व्हाट्सएप पर 7 से 10 सेकंड का एक संदिग्ध अश्लील वीडियो भेजा गया। साथ ही धमकी दी गई कि यदि 90 लाख रुपये नहीं दिए गए तो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा।
धमकी में कहा गया कि “सिर्फ 10 मिनट में आपकी प्रतिष्ठा मिट्टी में मिला दी जाएगी।” बाद में सौदेबाजी के दौरान फिरौती की रकम 90 लाख से घटाकर 60 लाख तक लाई गई।
लगातार मानसिक उत्पीड़न के बाद डॉक्टर ने हिम्मत जुटाकर सुभाष नगर थाना में शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, कुछ ही घंटों में खुलासा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल तकनीकी जांच शुरू की। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल लोकेशन और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जाल बिछाया गया।
जांच में सामने आया कि ब्लैकमेलिंग की साजिश डॉक्टर के अपने ही अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारियों ने रची थी।
थाना प्रभारी कैलाश कुमार विश्नोई के नेतृत्व में पुलिस टीम ने चार आरोपियों—
जफर,इमरान,अजय,जगदीश
को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों में से कुछ नर्सिंग स्टाफ बताए जा रहे हैं।
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने किसी कुख्यात अपराधी या गैंग का नाम लेकर डॉक्टर को डराने की कोशिश की, ताकि रकम जल्दी मिल सके।
संगीन धाराओं में मामला दर्ज
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2), 308(5), 61(2) के साथ आईटी एक्ट की धारा 67A सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस साजिश में कोई बाहरी गिरोह या बड़ा साइबर नेटवर्क शामिल है।
भरोसे का विश्वासघात
इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। जिन कर्मचारियों को डॉक्टर परिवार जैसा मानते थे, वही उनके खिलाफ साजिश रचते पाए गए।
डॉ. पंवार ने पुलिस को बताया कि वे लंबे समय से मानसिक दबाव और बदनामी के डर में जी रहे थे। पुलिस ने उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया है।
बढ़ता साइबर ब्लैकमेल का खतरा
यह मामला निजी संस्थानों में कर्मचारियों की विश्वसनीयता और साइबर ब्लैकमेलिंग के बढ़ते खतरे को उजागर करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत पुलिस से संपर्क करना चाहिए और किसी भी तरह की अवैध मांग को पूरा नहीं करना चाहिए।
पुलिस की अपील
पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी को भी इस प्रकार की धमकी या ब्लैकमेलिंग का सामना करना पड़े तो तुरंत निकटतम थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाएं और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें।
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि भरोसे और सुरक्षा पर बड़ा सवाल है।

Author: aapnocitynews@gmai.com




