
मेडतासिटी( तेजाराम लाडणवा)
मीरा नगरी मेड़ता सिटी ने आज एक ऐसे संतस्वभावी सेवक को खो दिया, जिसने अपना पूरा जीवन भगवान और समाज की सेवा में समर्पित कर दिया। ‘नेपाली बाबा’ केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि त्याग, वैराग्य और निस्वार्थ सेवा की जीवित मिसाल थे।
बताया जाता है कि उन्होंने अपने जीवन की सारी जमीन और दर्जनों ट्रकों जैसी संपत्ति दान कर सांसारिक मोह छोड़ दिया और मेड़ता सिटी आकर चारभुजा मंदिर में भगवान चारभुजा नाथ की सेवा को ही अपना धर्म बना लिया। पिछले चार दशकों से अधिक समय से वे मंदिर की सेवा, सफाई और श्रद्धालुओं को पानी पिलाने जैसे कार्यों में निरंतर लगे रहे।
उनका जीवन सादगी, संतोष और समर्पण का अद्भुत उदाहरण था। लाल भगवा चोला, शांत स्वभाव और कम बोलकर अधिक सेवा करने की उनकी शैली ने उन्हें पूरे शहर में सम्मान दिलाया। उन्होंने यह साबित किया कि सच्ची भक्ति शब्दों से नहीं, कर्म से होती है।
सेवा करते-करते ही उनका इस संसार से विदा होना उनके तपस्वी जीवन की सबसे बड़ी पहचान बन गया। यह किसी संत के जीवन का सबसे पवित्र अंत माना जाता है — जब अंतिम सांस भी ईश्वर की सेवा में ही निकले।
मेड़ता सिटी के लोगों के हृदय में नेपाली बाबा की स्मृति हमेशा जीवित रहेगी। उनका त्याग और सेवा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे।
ॐ शांति।


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