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“इंसानों से बढ़कर निकली एक पक्षी की वफादारी — पिपाड़ में मोर और घेवरराम जी की दोस्ती ने नम कर दीं आंखें”

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पीपाड ( तेजाराम लाडणवा)
कहते हैं प्रेम और अपनापन शब्दों का मोहताज नहीं होता। यह दिल से दिल तक पहुंचने वाला वह रिश्ता है, जिसे न भाषा की जरूरत होती है और न ही किसी स्वार्थ की। पिपाड़ शहर में ऐसा ही एक मार्मिक दृश्य सामने आया, जिसने इंसान और पशु-पक्षी के बीच के अटूट प्रेम को सजीव कर दिया।
पशु-पक्षी प्रेमी घेवरराम जी टाक अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके प्रति एक मोर की वफादारी आज भी लोगों के दिलों को छू रही है।
घेवरराम जी रोज़ इस मोर को अपने हाथों से दाना खिलाते थे। यह केवल दाना खिलाने का रिश्ता नहीं था — यह भरोसे, स्नेह और अपनत्व का रिश्ता बन चुका था। मोर इस कदर उनसे जुड़ गया था कि वह किसी और के हाथ से दाना तक नहीं खाता था। जब भी घेवरराम जी दिखाई नहीं देते, तो मोर उनके घर के दरवाजे और गेट पर बैठकर उनका इंतजार करता रहता।
दो दिन पहले जब घेवरराम जी का निधन हुआ, तो शायद इस बात को समझ पाना इंसानों के लिए जितना कठिन था, उतना ही उस मोर के लिए भी। रोज़ की तरह वह दाना खाने आया, लेकिन इस बार उसका दोस्त वहां नहीं था। लोगों ने उसे दाना खिलाने की बहुत कोशिश की, मगर उसने एक दाना भी नहीं चुगा।
वह इधर-उधर घूमता रहा, जैसे किसी अपने को ढूंढ रहा हो। शोक सभा के दौरान भी वह लोगों के बीच चुपचाप घूमता रहा — मानो अपने मित्र की तलाश कर रहा हो। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
फिर एक ऐसा पल आया जिसने सभी को भावुक कर दिया। परिवार के एक सदस्य ने मोबाइल में घेवरराम जी की तस्वीर मोर के सामने रखी और पास में दाने का प्याला रखा।
तस्वीर देखते ही मोर ने धीरे-धीरे दाना चुगना शुरू कर दिया — जैसे वह अपने दोस्त की मौजूदगी महसूस कर रहा हो।
उस क्षण वहां मौजूद लोगों को यह एहसास हुआ कि वफादारी और प्रेम केवल इंसानों की भावनाएं नहीं हैं — पशु-पक्षी भी इन्हें उतनी ही गहराई से महसूस करते हैं।
आज के समय में, जब रिश्तों में स्वार्थ और दूरी बढ़ती जा रही है, एक पक्षी की यह सच्ची दोस्ती हमें यह सिखाती है कि प्रेम का रिश्ता दिल से बनता है, शब्दों से नहीं।
घेवरराम जी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन एक मोर की आंखों में उनकी तलाश और तस्वीर देखकर दाना चुगने का वह दृश्य हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।
यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और वफादारी की ऐसी कहानी है, जो इंसानियत को आईना दिखाती है।

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