
फुलेरा (दामोदर कुमावत): भक्ति, शक्ति और सामाजिक एकता का एक अद्भुत संगम आज कचरोदा में संतों की तपो भूमि अखाड़ा पर देखने को मिला। सकल हिंदू समाज, कचरोदा द्वारा आयोजित ‘विशाल हिंदू सम्मेलन’ ने न केवल धर्म की ध्वजा फहराई, बल्कि मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी ने पूरे कार्यक्रम को भव्यता के नए शिखर पर पहुँचा दिया।त्रिवेणी संगम की तरह निकली भव्य कलश यात्रा

कार्यक्रम का आगाज किसी उत्सव से कम नहीं था। शहर के तीन प्रमुख केंद्रों—बाबा रामदेव मंदिर (बड़की ढाणी), आदर्श विद्या मंदिर (शिवाजी नगर) और श्याम मंदिर—से भव्य कलश यात्राएं निकाली गईं। सिर पर कलश धारण किए मातृशक्ति और जयकारों के बीच झूमते श्रद्धालुओं का हुजूम जब मुख्य मार्ग से गुजरा, तो पूरा वातावरण धर्ममय हो गया।

संतों का सानिध्य और ज्ञान की गंगा सम्मेलन को अध्यात्म की गहराई देते हुए पूज्य संतों ने अपने आशीर्वचन दिए। कार्यक्रम में महंत गोविंद दास महाराज (पंचमुखी हनुमान मंदिर) टांका बिचुन,त्रिलोकी दास महाराज (हरसिद्धि हनुमान मंदिर) फुलेरा एवं ब्रह्म विजई कंचन दीदी (निर्भय आश्रम वात्सल्य धाम) तथा हिंदू सम्मेलन के सचिव आनंदीलाल, वाल्मीकि समाज प्रमुख गोपाल, एवं मुख्य वक्ता प्रोफेसर भारत कुम्हार के पावन सानिध्य में सनातन संस्कृति की रक्षा और सामाजिक समरसता का संकल्प लिया गया। संतों ने अपने प्रवचनों में उपस्थित जनमानस को संस्कृति के प्रति जागरूक रहने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

संस्कृति और देशभक्ति काअनूठा संगम हिंदू सम्मेलन के दिनेश जी ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज में नई ऊर्जा और चेतना का संचार करना है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों और युवाओं ने देशभक्ति के गीतों पर शानदार प्रस्तुतियाँ दीं। मोबाइल से दूर रहने के लिए स्कूली बच्चियों द्वारा नाटक आयोजित किया।
मातृशक्ति का सम्मान: भजनों की अमृत वर्षा के साथ-साथ समाज की अग्रणी महिलाओं का सम्मान किया गया। पंच परिवर्तन संकल्प: उन परिवारों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया जो ‘पंच परिवर्तन’ के सिद्धांतों का पालन कर समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

Author: Aapno City News



