
भारत की नवाचारी शिक्षा-चेतना, मूल्य-आधारित शिक्षण और सांस्कृतिक निर्माण की यात्रा में एक ऐसा नाम पिछले दशक से निरन्तर उभर रहा है, जिसने अपने कार्यों, नेतृत्व, दूरदृष्टि और नैतिक दृढ़ता से देश-विदेश में विशिष्ट पहचान अर्जित की है। यह नाम है—जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय, लाडनूं के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़।
शिक्षा, प्रशासनिक क्षमता, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का दुर्लभ मेल रखने वाली प्रो. दूगड़ की शख्सियत न केवल अकादमिक जगत में प्रेरणास्त्रोत रही है बल्कि भारतीय अध्यात्म, जैन दर्शन और संस्कृति को आधुनिक वैश्विक परिप्रेक्ष्य से जोड़ने का बड़ा कार्य भी इनके नेतृत्व में हुआ है।
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर संस्थान की पहचान
कुलपति प्रो. दूगड़ ने जैन विश्वभारती संस्थान को बीते वर्षों में जिस ऊँचाई पर पहुँचाया है, वह स्वतः सिद्ध है। आधुनिक शिक्षा-व्यवस्थाओं, नीतियों, तकनीकी-आधारित शिक्षण, शोध-उन्मुख पाठ्यक्रमों और मूल्य-प्रधान शिक्षा से विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर भी विशिष्ट पहचान मिली है।
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की ECOSOC से सम्बद्ध इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एजुकेटर्स वर्ल्ड पीस द्वारा इन्हें
“एथिकल लीडरशिप एंड ह्यूमन वैल्यूज अवार्ड” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान जैन विश्वभारती के लिए उपलब्धि ही नहीं बल्कि भारतीय शिक्षा-पद्धति में ‘मानवीय मूल्य’ और ‘नैतिकता’ की पुनर्प्रतिष्ठा की दिशा में महत्वपूर्ण अध्याय है।
सम्मानों से सुशोभित शैक्षणिक यात्रा
प्रो. दूगड़ को इससे पूर्व भी देश-विदेश में अनेक विशिष्ट सम्मानों से विभूषित किया जा चुका है—
दुबई में ग्लोबल लीडर एचीवमेंट अवार्ड (2023)
कोलकाता में विश्वकवि रबीन्द्रनाथ टैगोर मेमोरियल अवार्ड
डॉ. राधाकृष्णन एक्सीलेंसी अवार्ड (2017)
जैन समाजों द्वारा विशेष सम्मान
इत्यादि…
इन सम्मानों ने न केवल इनके नेतृत्व को पुष्ट किया बल्कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को भी स्थायी आधार दिया।
आधुनिकता व संस्कृति के संतुलन का दुर्लभ रूप
प्रो. दूगड़ की कार्यशैली में सबसे अनूठी विशेषता यह है कि इन्होंने
“मूल्य + आधुनिकता + संस्कृति”
इन तीन स्तंभों के बीच अद्भुत संतुलन स्थापित किया।
एक ओर विश्वविद्यालय में LMS, ERP, ODL, ऑनलाइन कोर्सेज और डिजिटल शैक्षणिक व्यवस्थाएं लागू की गईं, तो दूसरी ओर जैन दर्शन, अहिंसा, शांति, प्रेक्षाध्यान, प्राच्य-विद्याएँ और भारतीय अध्यात्म को नए संदर्भों में व्यवस्थित किया गया।
संस्थागत विकास का स्वर्णकाल
पिछले दशक को जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का स्वर्णकाल कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं।
इन्हीं के कार्यकाल में
कोर्पस फंड में ऐतिहासिक वृद्धि
संस्थान का आत्मनिर्भर होना
भौतिक व शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
विश्वविद्यालय का ‘विज्डम सिटी’ के रूप में विकास
कर्मचारियों का कल्याण, वेतन, पदोन्नति व नियुक्तियाँ
20 नई नीति- नियमावलियों का निर्माण
नए विभागों व पाठ्यक्रमों का शुभारंभ
नई शिक्षा-नीति के अनुरूप उच्च स्तरीय अकादमिक सुधार
इन सबने विश्वविद्यालय को आधुनिक विश्वविद्यालयों की श्रेणी में स्थापित किया।
नवीन विभाग और मूल्य-प्रेरित पाठ्यक्रम
कुलपति दूगड़ के नेतृत्व में विश्वविद्यालय में अनेक नवीन, अनूठे व भविष्यवादी कार्यक्रम प्रारम्भ हुए
जैन जीवनशैली जैन पर्यावरण विज्ञान जैन ज्योतिष जैन प्रबंधन जैन आहार विज्ञान जैन मनोविज्ञान जैन पाण्डुलिपि विज्ञान जैन कलह-प्रबंधन संगीत विभाग, योग विभाग, नेचुरोपैथी एवं बी.एन.वाई.एस., राजस्थानी भाषा विभाग, ज्योतिष-वास्तु व अनेक अल्पकालिक ऑनलाइन कोर्सेज विशेष उपलब्धियाँ हैं।
आचार्यों के सान्निध्य का लाभ व जैन दर्शन का विस्तार
प्रो. दूगड़ की शैक्षणिक और आत्मिक यात्रा आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ और आचार्य महाश्रमण के मार्गदर्शन एवं सान्निध्य से विकसित हुई।
प्रेक्षाध्यान, अहिंसा-प्रशिक्षण, सापेक्ष-अर्थशास्त्र और ग्रामीण-विकास के क्षेत्रों में भी इन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
तेरापंथ समाज के अनेक मुनि व शोधार्थियों ने इन्हीं के निर्देशन में शोध कार्य पूर्ण किए।
मूल्यांकन में लगातार सफलता
कुलपति दूगड़ के कार्यकाल में विश्वविद्यालय ने NAAC, UGC, 12B, ODL, India Rankings,
आदि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं और मूल्यांकन में बार-बार सफलता अर्जित की।
विश्वविद्यालय को NAAC की “A ग्रेड” प्राप्त होना उल्लेखनीय उपलब्धि है।
पांडुलिपि संरक्षण : धरोहर का संरक्षण
इनके नेतृत्व में पांडुलिपियों के संरक्षण हेतु
‘मैन्युस्क्रिप्ट रिसोर्स सेंटर’ और पांडुलिपि संरक्षण केंद्र की स्थापना की गई, जहां हजारों पांडुलिपियों को सुरक्षित संरक्षित किया जा चुका है।
जीवंत परिणाम — श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की श्रेणी में प्रवेश
हाल के वर्षों में विश्वविद्यालय को
ग्लोबल एजुकेशन अवार्ड – बेस्ट डीम्ड यूनिवर्सिटी
सहित कई उपलब्धियाँ मिलीं।
निष्कर्ष मूल्य, नेतृत्व और उत्कृष्टता की शख्सियत
प्रो. बच्छराज दूगड़ आज उस श्रेणी की शख्सियत हैं, जहाँ
नेतृत्व = जिम्मेदारी + दूरदृष्टि + मूल्य + परिणाम होता है।
ये केवल कुलपति नहीं, बल्कि
शिक्षा-नवाचार, सांस्कृतिक चेतना और मूल्य-आधारित भविष्य के श्रेष्ठ निर्माता हैं।
लाडनूं जैसे छोटे कस्बे से निकलकर अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर भारतीय शिक्षा की ध्वजा लहराना, एक विशिष्ट उपलब्धि है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

Author: aapnocitynews@gmai.com




