
नागौर (तेजाराम लाडणवा )
नागौर जिला मुख्यालय स्थित शिवबाड़ी स्टेशन रोड पर विराजित श्रीयादे माता मंदिर में अखिल भारतीय श्रीयादे माता प्रजापति की जन्म जयंती को लेकर समाज बंधुओं की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक मंदिर ट्रस्ट व श्री श्रीयादे विकास समिति नागौर के अध्यक्ष नेमीचंद प्रजापत चेनार की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष भी 20 जनवरी, मंगलवार (माघ मास शुक्ल द्वितीया) को श्रीयादे माता की जन्म जयंती धूमधाम एवं भव्य रूप से मनाई जाएगी। इस अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक लाइटिंग एवं सजावट से सुसज्जित किया जाएगा। रात्रि में भव्य महाजागरण का आयोजन होगा, जिसमें मोहनराम एंड पार्टी, चेनार द्वारा भक्तिमय भजनों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। वहीं सायंकाल सर्व समाज एवं आमजन के लिए महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा। आयोजन की सफलता हेतु विभिन्न समितियों का गठन भी किया गया।


बैठक में उपस्थित समाज बंधुओं ने एकमत होकर यह भी निर्णय लिया कि मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर प्रतिवर्ष श्रीयादे माता जन्म जयंती को राजकीय अवकाश घोषित करने की मांग की जाएगी। अध्यक्ष नेमीचंद प्रजापत ने समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर आयोजन को ऐतिहासिक बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर समाज के वरिष्ठ वक्ता राजेंद्र प्रजापति ने प्रेरक संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि होली का पर्व माता श्री यादे की देन है, इसी कारण यह पर्व आज पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भक्त शिरोमणि श्री श्रीयादे माता प्रजापति ने बालक प्रह्लाद को भक्ति और सत्य का मार्ग दिखाया। उसी दिव्य ज्ञान के आधार पर प्रह्लाद ने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग अपनाया और भगवान विष्णु पर अटूट विश्वास रखा।
राजेंद्र प्रजापति ने पौराणिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब हिरण्यकश्यप ने अत्याचार की सारी सीमाएं लांघ दीं, तब भी प्रह्लाद अपने गुरु स्वरूपा भक्त शिरोमणि श्री श्रीयादे माता की शिक्षाओं पर अडिग रहे। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने अन्याय का साथ देते हुए प्रह्लाद को अग्नि में भस्म करने का प्रयास किया, किंतु सत्य और भक्ति की विजय हुई—होलिका स्वयं जलकर राख हो गई और प्रह्लाद सुरक्षित बाहर निकल आए।
उन्होंने कहा कि इसी सत्य की विजय और भक्ति की महिमा के प्रतीक रूप में आज पूरे देश में होली का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भगवान विष्णु की अनन्य भक्त, भक्त शिरोमणि श्री श्रीयादे माता प्रजापति की स्मृति से जुड़ा हुआ है। इसलिए प्रत्येक सनातनी तथा सच्चाई के मार्ग पर चलने वाले प्रत्येक व्यक्ति को श्री श्रीयादे माता प्रजापति की जयंती श्रद्धा और गर्व के साथ मनानी चाहिए।
राजेंद्र प्रजापति ने यह भी कहा कि माता श्रीयादे ने करुणा और भक्ति का ऐसा अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया कि बिल्ली के बच्चों को बचाने के लिए भी उन्होंने अपने प्राणों की परवाह नहीं की और भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहीं। उनकी इसी महान तपस्या और त्याग से प्रभावित होकर भक्त प्रह्लाद ने उन्हें अपना गुरु माना और सत्य के मार्ग पर चल पड़े। परिणामस्वरूप अहंकार, अधर्म और अन्याय का विनाश होता गया। इसी आनंद और विजय के प्रतीक रूप में आज संपूर्ण सनातनी समाज होली का पर्व हर्षोल्लास से मनाता है।
बैठक में समाज के अनेक गणमान्य नागरिक व पदाधिकारी उपस्थित रहे और सभी ने श्रीयादे माता जयंती को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया।

Author: aapnocitynews@gmai.com




