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श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिवस में प्रभु नागर ने कहा — “इंद्रियों की शक्ति थोड़े समय की, भक्ति की शक्ति जन्म-जन्मांतर तक”

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मेड़ता सिटी (तेजाराम लाडणवा)
मेड़ता सिटी के ऐतिहासिक भक्त शिरोमणि मीराबाई मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिवस में कथावाचक प्रभु नागर जी ने हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति, चिंतन और जीवन दर्शन पर संदेश देते हुए कहा कि इंद्रियों की शक्ति कुछ वर्षों तक रहती है, जबकि भक्ति की शक्ति जन्म-जन्मांतर तक साथ देती है।
उन्होंने कहा कि परमपिता परमेश्वर द्वारकानाथ ही वह सूत्रधार हैं जो इस जगत में सबको माया में नचा रहे हैं। मीराबाई की भक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “मेड़ता मेड़ता से मेड़ती लाल हो गया”, क्योंकि मीरा ने भक्ति को लोक में नहीं, लोक से परे भक्ति के भाव में जिया।


प्रभु नागर जी ने भावपूर्ण शैली में कहा कि मनुष्य को न करोड़पति, न अरबपति, बल्कि हज़ारों का मालिक ‘हजारीलाल’ समझकर जीवन जीना चाहिए। जब सोच सरल हो जाती है तो परिवार का नजरिया और जीवन की दिशा भी बदल जाती है।
उन्होंने कहा कि “सुख और दुख दोनों जोड़ी में आते हैं। भगवान का भक्त पीड़ित हो सकता है, पर दुखी नहीं।” जीवन को सार्थक बनाने के लिए साल में एक बार अवश्य भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए और माता-पिता को भी करवाना चाहिए।
कथा में मेड़ता क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों से दर्जनों बसों में महिलाएं, पुरुष एवं बालक उत्साह के साथ पहुँचकर कथा का रसास्वादन कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पंडाल प्रतिदिन विस्तृत किया जा रहा है। आयोजन परिवार भी पूर्ण निष्ठा एवं भाव से कथा में उपस्थित हैं।
महाराज ने विशेष रूप से कहा कि भजन-कीर्तन के साथ चिंतन भी अनिवार्य है, क्योंकि जो व्यक्ति चिंतन नहीं कर सकता, वह जीवन में आगे नहीं बढ़ सकता।

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