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श्रद्धा, साधना और सनातन चेतना का अनुपम संगम बना रगतमल भैरवनाथ धाम

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मेडतासिटी (तेजाराम लाडणवा)
जहां आस्था बोलती है और मौन भी प्रार्थना बन जाता है, ऐसे ही दिव्य क्षणों की साक्षी बनी रगतमल भैरवनाथ मंदिर की पावन धरा। बाल साध्वी हेमलता बाईसा (64 जोगणिया उपासक) एवं गोरक्षा के प्रखर साधक, दादू आश्रम रतनगढ़ तथा दादू आश्रम छतरी धाम के महंत हरि नारायण महाराज,  के आगमन से मंदिर परिसर श्रद्धा, साधना और सनातन चेतना से आलोकित हो उठा।
माता रानी एवं भैरू बाबा के श्रीचरणों में विशेष पूजा-अर्चना के दौरान वातावरण मंत्रोच्चार, धूप-दीप और भक्ति भाव से ओत-प्रोत हो गया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं शक्ति और भैरव ने भक्तों की उपस्थिति को स्वीकार कर लिया हो।
इस अवसर पर मंदिर के मुख्य पुजारी एवं भैरव उपासक शिवरतन आशीवाल तथा ट्रस्ट के सदस्यों ने परंपरागत भाव-भंगिमा के साथ बाल साध्वी हेमलता बाईसा, महंत हरि नारायण जी एवं उनके साथ पधारे साधक-भक्तों का माला, दुपट्टा, सोल, साफा एवं मुंह-मिठास से भव्य स्वागत-सम्मान किया।
दर्शन उपरांत बाल साध्वी हेमलता बाईसा ने समस्त भक्तजनों के लिए सुख, समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना करते हुए माता रानी और भैरू बाबा से आशीर्वाद प्राप्त किया। उनकी साधना-सिद्ध दृष्टि और वाणी ने उपस्थित श्रद्धालुओं के मन में विश्वास, ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का संचार कर दिया।
यह अवसर केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, गोरक्षा भावना और साधना मार्ग की जीवंत अभिव्यक्ति बनकर लंबे समय तक स्मृतियों में अंकित रहेगा।

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