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मीरा नगरी मेड़ता में श्रीमद्भागवत कथा के पंडाल पर बंदरों का हमला, प्रशासन मौन

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मेड़ता सिटी (तेजाराम लाडणवा)
मीरा नगरी मेड़ता सिटी इन दिनों धर्म और भक्ति के रंग में रंगी हुई है। रमन मुनि महाराज के मुखारविंद से तेलियां के मोहल्ले में, सुखदेव जी महाराज के मुखारविंद से दादू जी महाराज की क्षत्रियों में, स्थित मीरा स्मारक में उदयपुर के संत राधिका शरण जी महाराज के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन चल रहा है, वहीं आगामी पाच सात दिनों बाद मूलदास बांके दास के बंगले में भी विशाल कथा प्रारंभ होने जा रही है। इन आयोजनों में शहर के बुजुर्ग, वृद्धजन, युवा और महिलाएं बड़ी संख्या में भक्ति रस का आनंद लेने शहर के विभिन्न मोहल्लों से पहुंच रहे हैं।
लेकिन इस आध्यात्मिक माहौल के बीच एक गंभीर और भयावह समस्या लगातार सिर उठा रही है। शहर की लगभग हर गली, चौराहा और चौक पर आवारा पशुओं के साथ-साथ बंदरों का भारी आतंक बना हुआ है। यही नहीं, बीती रात मीरा स्मारक में कथा के लिए लगाए गए पंडाल को बंदरों द्वारा भारी नुकसान पहुंचाया गया। पंडाल लगाए गए गमले फुल डेकोरेशन के साथ भारी तोड़फोड़ किया गया है आयोजकों को रात में ही भारी मशक्कत करनी पड़ी।
पुराना हॉस्पिटल सेवकों के मोहल्ले में एवं शहर में बंदरों का भारी अंतक है सर्दी में छत पर जाना भी मुश्किल हो रखा है शहर मे आए दिन आवारा पशुओं के कारण मंदिर आने जाने में भी भारी परेशानी होरी हैं कई बार श्रद्धालु घायल, फिर भी प्रशासन बेपरवाह
शहरवासियों का कहना है कि बंदरों और आवारा पशुओं के हमले से राह चलते लोग घायल हो रहे हैं परेशान, कई बार बुजुर्ग और बच्चे गंभीर चोट का शिकार हो चुके हैं। पूर्व में इन घटनाओं के कारण कई लोगों की जान तक जा चुकी है, और कुछ मामले आज भी न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
केवल खानापूर्ति तक सीमित कार्रवाई
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका और प्रशासन की ओर से केवल खानापूर्ति की जा रही है। न तो बंदरों की धरपकड़ की स्थायी योजना है और न ही आवारा पशुओं को लेकर कोई ठोस प्रबंधन। धार्मिक आयोजनों के दौरान जहां सुरक्षा और व्यवस्था प्राथमिक होनी चाहिए, वहां श्रद्धालु खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
श्रद्धा बनाम सुरक्षा — बड़ा सवाल
धार्मिक आयोजनों में शामिल होने आ रहे श्रद्धालुओं की सुरक्षा से बड़ा सवाल आखिर और क्या हो सकता है? यदि समय रहते प्रशासन ने गंभीर कदम नहीं उठाए, तो यह स्थिति किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
अब शहरवासियों की एक ही मांग है—
क्या प्रशासन किसी और अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
या फिर भक्ति नगरी मेड़ता में श्रद्धा के साथ-साथ सुरक्षा का भरोसा भी सुनिश्चित किया जाएगा?

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