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ढाणी नागान हुई भक्ति भाव से सराबोर। श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन झूम उठा जनसैलाब, कृष्ण-राम नाम से गूंजा आसमान

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ढाणी नागान हुई भक्ति भाव से सराबोर।
श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन झूम उठा जनसैलाब, कृष्ण-राम नाम से गूंजा आसमान

फुलेरा(दामोदर कुमावत)कस्बे के समीप ढाणी नागान इन दिनों  धार्मिक स्थल नजर आ रहा है। यहां चल रहे सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के पांचवे दिन ऐसा नज़ारा देखने को मिला, मानो श्रद्धा का सागर उमड़ पड़ा हो। सुबह से श्याम तक कथा स्थल पर श्रद्धालु भक्तों की अपार भीड़ का आवागमन यहां के क्षेत्र को भक्ति, आस्था और अध्यात्म का आलम बना दिया।

यहां वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास पंडित दिलखुश नागदा महाराज ने अपने ओजस्वी, और रसपूर्ण प्रवचनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माता यशोदा के वात्सल्य, नंद बाबा से गाय चराने की अनुमति और गर्ग आचार्य द्वारा नामकरण संस्कार का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि श्रोता भावुक हो उठे और उनकी आंखें नम हो गईं।कथा के दौरान महाराज ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चरित्र का भी मार्मिक वर्णन किया।

अयोध्या से वनवास गमन, वनवास काल में अवध में दीपक-अगरबत्ती न जलाने की परंपरा और कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने पर दीपावली पर्व की शुरुआत का प्रसंग सुनकर पंडाल तालियों और जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा।इस विशाल आयोजन के मुख्य यजमान गौरीशंकर शर्मा एवं मीना शर्मा रहे, जिनकी आस्था और समर्पण से यह आयोजन भव्य रूप ले सका।

आयोजन को सफल बनाने में सुनील-राधा, महेश शर्मा, सुधा देवी, शंकर सहाय, संतोष शर्मा, मुकेश शर्मा, गिरधर गोपाल, जय प्रकाश शर्मा,ब्रजमोहन, लालचंद, गोपाल लाल, कौशल्या, विनोद देवी, संतोष कुमावत एवं अरुणा शर्मा सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमियों का सराहनीय योगदान रहा।कथा संचालन और व्यवस्थाओं की कमान पंडित प्रभा दुबे, पंडित अभय तिवाड़ी एवं पंडित अभिषेक मिश्रा ने संभाली, जिनके कुशल निर्देशन में पूरा कार्यक्रम अनुशासित, सुव्यवस्थित और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हो रहा है।


प्रतिदिन कथा के साथ भजन- कीर्तन, महाआरती और प्रसादी वितरण किया जा रहा है। रात्रि के समय दीपों से सजा पंडाल और मधुर भक्ति संगीत ने पूरे क्षेत्र को वृंदावन और अयोध्या की अनुभूति करा दी। ग्रामीणों का कहना है कि ढाणी नागान में पहली बार भव्य, भावनात्मक और ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन देखने को मिल रहा है।
श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव ने न केवल लोगों की धार्मिक आस्था को नई मजबूती दी है, बल्कि समाज में एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना का भी नया संचार किया है।

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