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प्रदेश स्तरीय किसान सम्मेलन से पहले भाजपा बैठक, मगर बैठने की व्यवस्था ने खड़े किए सियासी सवाल

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मेडतासिटी (राजनीतिक विश्लेषण )

मेड़ता में गुटबाजी की चर्चाएं तेज, नेताओं की दूरी बनी चर्चा का केंद्र

मीरा नगरी मेड़ता सिटी में 23 दिसंबर को आयोजित होने वाले प्रदेश स्तरीय किसान सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। सम्मेलन को संबोधित करने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘मामा’ एवं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आगमन को लेकर रविवार को मेड़ता नगर पालिका परिसर में भाजपा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं किसान आयोग के अध्यक्ष सी.आर. चौधरी ने की। बैठक में भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मंच की तस्वीर बनी सियासी चर्चा का विषय
बैठक के दौरान मंच पर बैठने की व्यवस्था ने शहर की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
नगर पालिका हाल में मुख्य एवं वीआई पी चैयर पर किसान आयोग के अध्यक्ष सीआर चौधरी, नगर पालिका अध्यक्षा शोभा लाहोटी,भाजपा महिला जिलाध्यक्षा कल्पना चौहान तथा उनके पास वाली सामान्य सीट पर विधायक लक्ष्मण राम मेघवाल बैठे नजर आए, वहीं दूसरी ओर सी.आर. चौधरी के निकट माने जाने वाले नवरतन सिंघवी, पूर्व विधायक सुखराम मेघवाल, ब्रह्मदेव सिंह जेसस, सहित अन्य नेता विराजमान रहे।
विधायक लक्ष्मण राम मेघवाल की मंच पर दूरी और सिघवी की सी.आर. चौधरी से नजदीकी वर्तमान विधायक की दूरी शहर में दिनभर चर्चा का विषय बनी रही।
क्या भाजपा में दिख रही है दो गुटों की तस्वीर?
राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि—
क्या मेड़ता भाजपा में दो स्पष्ट गुट उभर कर सामने आ रहे हैं?

क्या नवरतनमल का कद विधायक से बड़ा होता जा रहा है, जिससे विधायक को साइड में बैठना पड़ा?

या फिर यह केवल बैठक की औपचारिक व्यवस्था थी, जिसे बेवजह तूल दिया जा रहा है?

अंदरखाने की गुटबाजी रही तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि यह गुटबाजी अंदर ही अंदर बनी रही, तो बड़े नेताओं के दौरे के दौरान
विरोध के स्वर,काले झंडे,या फिर संगठनात्मक असंतोष जैसी स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
शीर्ष नेतृत्व की नजरें अब मेड़ता पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए यह बैठक संगठनात्मक मजबूती के लिए अहम मानी जा रही है। ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर यह जिम्मेदारी है कि आपसी समन्वय बनाकर एकजुटता का संदेश दिया जाए, ताकि किसान सम्मेलन पूरी तरह सफल हो सके।

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