
फुलेरा में ‘मौन’ रहे मुख्यमंत्री। भव्य स्वागत के बीच मायूसी की गूंज!
फुलेरा (दामोदर कुमावत)। जब सूबे के मुखिया के स्वागत में पलक-पावड़े बिछे हों, 51 किलो की माला और गदा भेंट की गई हो, तब जनता को उम्मीद थी कि उनके ‘मन की बात’ सुनी जाएगी। लेकिन सांभर जाते समय फुलेरा रुके मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ‘चुप्पी’ ने सबको हैरान कर दिया।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया भव्य स्वागत, पर संवाद का सूखा।मुख्यमंत्री के आगमन पर भाजपा के पूर्व विधायक निर्मल कुमावत, जिला अध्यक्ष राजेश गुर्जर, शिवजी राम कुमावत और मंडल अध्यक्ष प्रणव अग्रवाल सहित कार्य कर्ताओं ने जोश के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मंच सज चुका था, गदा और मालाएं पहनाई गईं, लेकिन जैसे ही जनता के बीच बोलने की बारी आई, मुख्यमंत्री बिना एक शब्द कहे आगे बढ़ गए।कस्बे के लोग की समस्याओं के ज्ञापन हाथ में लिए खड़े थे, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें दूर ही रखा। जनता और कार्यकर्ताओं में इस बात की टीस रही कि मुख्यमंत्री ने एक बार अभिवादन तक नहीं किया।

चर्चाओं का बाजार गर्म: क्या थी वजह? कार्यक्रम के बाद गलियारों में दो बातें सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं: सियासी समीकरण: क्षेत्र में भाजपा का विधायक न होना क्या संवाद हीनता की वजह बना?
* भीड़ का गणित: सीएम के काफिले के रसूख के मुकाबले जनता की मौजूदगी कम रहना भी चर्चा का केंद्र रहा।
इस दौरान उनके साथ उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बेरवा भी मौजूद रहे, लेकिन जनता की मायूसी साफ झलक रही थी। “

प्रोटोकॉल के नाम पर सुरक्षा कर्मियों ने मीडिया से धक्का- मुक्की किया: कवरेज में बिखरा ‘असंतोष’ सिर्फ जनता ही नहीं, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यानी मीडिया भी इस दौरे से खफा दिखा। सुरक्षाकर्मियों द्वारा कवरेज के दौरान मीडिया कर्मियों से की गई धक्का-मुक्की ने माहौल को और गर्मा दिया।

अव्यवस्था के कारण कई पत्रकार सही से कवरेज नहीं कर पाए, जिसे लेकर स्थानीय मीडिया जगत में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
फूल-मालाओं से स्वागत तो हुआ, लेकिन संवाद के अभाव ने इस दौरे को फीका कर दिया। क्या यह महज प्रोटोकॉल था या कुछ और? यह सवाल अब फुलेरा की जनता के बीच तैर रहा है।

Author: Aapno City News




