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डीडवाना-कुचामन जिले के कुचामन मुख्यालय में बदलेगी डंपिंग यार्ड की तस्वीरबदबू से मिलेगी मुक्ति, रिंग रोड पर विकसित होगा ‘अर्बन सर्कुलर फॉरेस्ट-04’

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कुचामन सिटी 🖊 तेजाराम लाडणवा

राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिला के कुचामन मुख्यालय स्थित रिंग रोड डंपिंग यार्ड की पहचान अब पूरी तरह बदलने जा रही है। वर्षों से कचरे की दुर्गंध और प्रदूषण के कारण बदनाम यह क्षेत्र जल्द ही हरियाली की नई मिसाल बनेगा। बरगद संरक्षण फाउंडेशन द्वारा यहां ‘अर्बन सर्कुलर फॉरेस्ट-04’ विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
राष्ट्रीय सहयोग से पर्यावरणीय पहल
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत राष्ट्रीय सीमा शुल्क अप्रत्यक्ष कर एवं नारकोटिक्स अकादमी (नासिन) जयपुर के सौजन्य से की गई है। संस्थागत सहयोग से परियोजना को तकनीकी मजबूती और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
कूड़े के ढेर से ‘ऑक्सीजन यार्ड’ तक
वर्तमान में रिंग रोड से गुजरने वाले राहगीरों और आसपास के निवासियों को कचरे की तीव्र दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के रूप में ‘सर्कुलर फॉरेस्ट’ मॉडल अपनाया गया है। इसके तहत डंपिंग यार्ड को चरणबद्ध तरीके से हरित क्षेत्र में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और नागरिकों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा।
वैज्ञानिक पद्धति से भूमि उपचार
फाउंडेशन के निदेशक नेताराम कुमावत ने बताया कि उद्देश्य केवल पौधारोपण नहीं, बल्कि नष्ट हो चुके पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्जीवन है।
फॉरेस्ट विशेषज्ञ रोहन टाक के अनुसार, लवणीय और अनुपजाऊ भूमि का ऑर्गेनिक वेस्ट मटेरियल, जिप्सम, बालू मिट्टी और जैविक खाद से उपचार किया जाएगा। इससे मिट्टी को उपजाऊ बनाकर दीर्घकालिक हरित विकास सुनिश्चित किया जाएगा।
40 प्रजातियों के 2100 पौधों का रोपण
परियोजना के प्रथम चरण में 40 विभिन्न प्रजातियों के 2100 पौधे लगाए जाएंगे। सघन वृक्षारोपण से एक प्राकृतिक ‘ग्रीन सर्कल’ तैयार होगा, जो धूल और प्रदूषण को नियंत्रित करने के साथ-साथ तापमान में कमी लाने में भी सहायक होगा।
यह पहल डीडवाना-कुचामन जिले के लिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। आने वाले समय में यह ‘अर्बन सर्कुलर फॉरेस्ट’ क्षेत्र को बदबू से मुक्ति दिलाकर हरियाली और स्वच्छ हवा का प्रतीक बनाएगा।

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