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बाजार से गायब हुए 10, 20 और 50 के नोट, आम जनता और छोटे व्यापारी परेशान🖋तेजाराम लाडणवाखुल्ले पैसों की किल्लत से रोजमर्रा का लेन-देन प्रभावित, सब्जी विक्रेता से लेकर ऑटो चालकों तक सभी हलकानशहर और कस्बों के बाजारों में इन दिनों 10, 20 और 50 रुपये के नोटों की भारी कमी देखने को मिल रही है। खुल्ले पैसों की इस किल्लत ने आम जनता के साथ-साथ छोटे व्यापारियों की परेशानी बढ़ा दी है। रोजमर्रा के छोटे लेन-देन में आने वाली यह समस्या अब व्यापार पर सीधा असर डाल रही है।छोटे व्यापारियों की बढ़ी चिंतासब्जी विक्रेता, ऑटो चालक और छोटे किराना दुकानदारों को ग्राहकों को शेष राशि लौटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई बार ग्राहकों को या तो टॉफी या अन्य छोटी वस्तु देकर समायोजन करना पड़ता है, जिससे दोनों पक्षों में असंतोष की स्थिति बन रही है।सब्जी मंडी में कारोबार करने वाले व्यापारियों का कहना है कि दिनभर में सैकड़ों छोटे लेन-देन होते हैं, लेकिन खुल्ले नोट नहीं होने से समय भी अधिक लग रहा है और ग्राहकों से अनावश्यक बहस भी हो रही है।ग्राहकों को भी हो रही असुविधाग्राहकों का कहना है कि 100 या 200 रुपये का नोट देने पर जब दुकानदार के पास छुट्टा नहीं होता तो खरीदारी में असुविधा होती है। कई बार उन्हें अतिरिक्त सामान लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।डिजिटल भुगतान पर बढ़ रहा जोरकुछ दुकानदारों ने डिजिटल भुगतान का विकल्प अपनाया है, लेकिन सभी ग्राहक डिजिटल माध्यम से भुगतान करने में सहज नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों और बुजुर्गों के लिए यह विकल्प अभी भी चुनौती बना हुआ है।समाधान की मांगव्यापारियों ने मांग की है कि बैंकों और संबंधित विभागों को छोटे मूल्य वर्ग के नोटों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि बाजार में सुचारू रूप से लेन-देन हो सके।फिलहाल खुल्ले पैसों की कमी ने आमजन और छोटे व्यापारियों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी को कठिन बना दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो इसका असर छोटे व्यापार और स्थानीय बाजारों पर और अधिक देखने को मिल सकता है।

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बाजार से गायब हुए 10, 20 और 50 के नोट, आम जनता और छोटे व्यापारी परेशान🖋तेजाराम लाडणवाखुल्ले पैसों की किल्लत से रोजमर्रा का लेन-देन प्रभावित, सब्जी विक्रेता से लेकर ऑटो चालकों तक सभी हलकानशहर और कस्बों के बाजारों में इन दिनों 10, 20 और 50 रुपये के नोटों की भारी कमी देखने को मिल रही है। खुल्ले पैसों की इस किल्लत ने आम जनता के साथ-साथ छोटे व्यापारियों की परेशानी बढ़ा दी है। रोजमर्रा के छोटे लेन-देन में आने वाली यह समस्या अब व्यापार पर सीधा असर डाल रही है।छोटे व्यापारियों की बढ़ी चिंतासब्जी विक्रेता, ऑटो चालक और छोटे किराना दुकानदारों को ग्राहकों को शेष राशि लौटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई बार ग्राहकों को या तो टॉफी या अन्य छोटी वस्तु देकर समायोजन करना पड़ता है, जिससे दोनों पक्षों में असंतोष की स्थिति बन रही है।सब्जी मंडी में कारोबार करने वाले व्यापारियों का कहना है कि दिनभर में सैकड़ों छोटे लेन-देन होते हैं, लेकिन खुल्ले नोट नहीं होने से समय भी अधिक लग रहा है और ग्राहकों से अनावश्यक बहस भी हो रही है।ग्राहकों को भी हो रही असुविधाग्राहकों का कहना है कि 100 या 200 रुपये का नोट देने पर जब दुकानदार के पास छुट्टा नहीं होता तो खरीदारी में असुविधा होती है। कई बार उन्हें अतिरिक्त सामान लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।डिजिटल भुगतान पर बढ़ रहा जोरकुछ दुकानदारों ने डिजिटल भुगतान का विकल्प अपनाया है, लेकिन सभी ग्राहक डिजिटल माध्यम से भुगतान करने में सहज नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों और बुजुर्गों के लिए यह विकल्प अभी भी चुनौती बना हुआ है।समाधान की मांगव्यापारियों ने मांग की है कि बैंकों और संबंधित विभागों को छोटे मूल्य वर्ग के नोटों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि बाजार में सुचारू रूप से लेन-देन हो सके।फिलहाल खुल्ले पैसों की कमी ने आमजन और छोटे व्यापारियों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी को कठिन बना दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो इसका असर छोटे व्यापार और स्थानीय बाजारों पर और अधिक देखने को मिल सकता है।

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