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चारभुजा के चरणों में समर्पित जीवन का अंत: करोड़ों की संपत्ति दान कर सेवा में लीन रहे ‘नेपाली बाबा’ का देवलोक गमन

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मेड़तासिटी (तेजाराम लाडणवा)

मीरा नगरी मेड़ता सिटी में नगरसेठ चारभुजा नाथ की सेवा में जीवन अर्पित करने वाले ‘नेपाली बाबा’ का शुक्रवार सुबह सेवा करते-करते ही देहावसान हो गया। करीब 90–95 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। समाचार फैलते ही शहर में शोक की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
पुजारी मनोहर लाल शर्मा ने बताया  कि हिमाचल प्रदेश निवासी इस तपस्वी ने लगभग 40–45 वर्ष पहले अपनी सारी जमीन और दर्जनों ट्रकों को मंदिर के पुजारी को दान कर दिया और मेड़ता सिटी आकर चारभुजा मंदिर में भगवान चारभुजा नाथ की सेवा में लग गए। तभी से उन्होंने सेवा को ही अपना जीवन बना लिया।
सेवा ही उनकी पहचान बनी
नेपाली बाबा नियमित रूप से मंदिर की सफाई, दरवाजों को धोना और अन्य सेवा कार्य करते थे। कई वर्षों तक मंदिर परिसर के बरामदे में ही रात्रि विश्राम किया और स्वयं भोजन बनाकर ग्रहण करते रहे।
करीब 15–20 वर्षों से वे मीराबाई मंदिर के सामने स्थित सार्वजनिक धर्मशाला में रहने लगे और मंदिर की प्याऊ में बैठकर दिनभर श्रद्धालुओं को पानी पिलाना उनकी दिनचर्या बन गई थी।
सेवा करते-करते ही ली अंतिम सांस
शुक्रवार सुबह भी उन्होंने नियमित रूप से मंदिर सेवा की। सुबह लगभग 9 बजे  पुजारी मनोहर लाल से मिलकर उन्हें चार चीकू और बेर प्रसाद के रूप में दिए। इसके कुछ समय बाद धर्मशाला के गेट के पास वे लड़खड़ाकर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने संभाला, लेकिन तब तक उनके प्राण पखेरू उड़ चुके थे।
शहर ने दी भावभीनी विदाई
खबर फैलते ही शहरभर के श्रद्धालु, व्यापारी, मंदिर पुजारी और सामाजिक संगठनों के लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
नेपाली बाबा का जीवन त्याग, सेवा और भक्ति का अद्भुत उदाहरण रहा। करोड़ों की संपत्ति छोड़कर चारभुजा नाथ की सेवा में समर्पित यह संत अंत तक उसी सेवा में लगे रहे।

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