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हिरणखुरी में जीरा की उन्नत खेती पर अनुसूचित जाति किसानों का प्रशिक्षण, वैज्ञानिक तकनीकों से आत्मनिर्भरता पर जोर

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मेड़ता सिटी-(तेजाराम लाडणवा)

कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर, डॉ. बी. आर. चौधरी कृषि अनुसंधान केंद्र मंडोर तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की अखिल भारतीय समन्वित मसाला अनुसंधान परियोजना, कालीकट (केरल) के संयुक्त तत्वावधान में हिरणखुरी गाँव में अनुसूचित जाति के किसानों के लिए जीरा की उन्नत खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हिरणखुरी सहित आसपास के गाँवों के लगभग 60 किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति के किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ते हुए जीरा उत्पादन, गुणवत्ता और आय में वृद्धि करना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाना रहा।
मुख्य अतिथि विधायक लक्ष्मण राम कलरू ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज कृषि पारंपरिक कार्य से आगे बढ़कर लाभकारी व्यवसाय बन चुकी है। उन्होंने युवाओं को कृषि शिक्षा से जुड़ने, प्राकृतिक खेती अपनाने और पशुपालन को आय का अतिरिक्त स्रोत बनाने की प्रेरणा दी।
क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. एम. एल. मेहरिया ने जीरे की उन्नत एवं रोग प्रतिरोधी किस्मों, उचित बुवाई समय, बीज दर, उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था तथा समन्वित कीट एवं रोग प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने रसायनों के संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए बताया कि असंतुलित उपयोग से अवशेष की समस्या उत्पन्न होती है, जिससे निर्यात प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि भारत मसाला उत्पादन, उपभोग और निर्यात में विश्व में अग्रणी है तथा जीरे से प्रतिवर्ष लगभग 5800 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।
परियोजना प्रभारी डॉ. अनिल कुमार वर्मा ने अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की जानकारी देते हुए मृदा स्वास्थ्य कार्ड, जैव उर्वरकों के उपयोग और मृदा परीक्षण आधारित खेती अपनाने पर बल दिया।
सहायक आचार्य डॉ. हरि दयाल चौधरी ने फसल विविधीकरण, खेतों की मेड़ पर फलदार पौधे लगाने, सब्जी उत्पादन तथा मिट्टी-पानी की जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने जीरे के बीज उत्पादन की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
कृषि विभाग मेड़ता के सहायक निदेशक रामप्रकाश बेड़ा ने पॉलीहाउस, फार्म पोंड और सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं की जानकारी देते हुए वर्षा जल संचयन से दो फसली खेती की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान किसानों के साथ तकनीकी संवाद और प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। अंत में किसानों को अनाज भंडारण टंकी, तिरपाल, फलदार पौधे तथा कीटनाशी और फफूंदनाशी सामग्री वितरित की गई। किसानों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए आयोजक संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर रामकरण मेहरिया, रामरतन मेहरिया, पूसाराम मेहरिया, प्रकाश मेघवाल सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।

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