

मेड़ता सिटी से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहाँ देश की जानी-मानी गोल्ड लोन एनबीएफसी मुथूट फाइनेंस की कार्यप्रणाली पर सिविल कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गोल्ड लोन की पूरी राशि जमा होने के बावजूद ग्राहक को उसके स्वर्ण आभूषण लौटाने से इंकार करना कंपनी को भारी पड़ गया।
प्रकरण के अनुसार पीड़िता इंदिरा देवी सोनी ने मुथूट फाइनेंस से लिए गए गोल्ड लोन की समस्त देय राशि नियमानुसार जमा करवा दी थी। इसके बाद भी कंपनी द्वारा गोल्ड आभूषण वापस नहीं किए गए और लगातार टालमटोल की जाती रही। मजबूर होकर पीड़िता ने एडवोकेट रामविलास दाधीच के माध्यम से सिविल कोर्ट में याचिका दायर की।
न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मुथूट फाइनेंस की कार्यशैली पर तीखी नाराजगी जताई और इसे उपभोक्ता अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन बताया। कोर्ट ने साफ कहा कि ऋण की पूरी राशि जमा होने के बाद भी गोल्ड न लौटाना अवैधानिक और मनमानी है।
कोर्ट ने गोल्ड वापस नहीं करने की स्थिति में समान कुर्की के आदेश जारी किए। आदेशों की पालना में सिविल कोर्ट के शेरअमीन अमित आत्रेय पुलिस जाब्ते के साथ मुथूट फाइनेंस कार्यालय पहुंचे और कुर्की की कार्रवाई की तैयारी की गई। कोर्ट की इस सख्ती से कंपनी में हड़कंप मच गया।
अंततः न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद मुथूट फाइनेंस को झुकना पड़ा और पीड़िता को उसके स्वर्ण आभूषण लौटाने पर सहमति जतानी पड़ी।
यह मामला न केवल मुथूट फाइनेंस जैसी बड़ी वित्तीय संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए यह संदेश भी देता है कि न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से अधिकार जरूर मिलते हैं। कोर्ट की यह सख्ती उपभोक्ता हितों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और मिसाल कायम करने वाला कदम मानी जा रही है।

Author: aapnocitynews@gmai.com





