

राजस्थान की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ताराचंद सहारन ने पार्टी को अलविदा कहकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) का दामन थाम लिया है। यह कदम गोविंद सिंह डोटासरा के गढ़ माने जाने वाले इलाके में कांग्रेस की पकड़ को कमजोर करता साफ नजर आ रहा है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के साथ नई सियासी पारी की शुरुआत करते हुए सहारन ने जमीनी स्तर पर कांग्रेस को सीधी चुनौती का संदेश दे दिया है।
आरएलपी जॉइनिंग के दौरान ताराचंद सहारन के साथ कई प्रभावशाली नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। आरएलपी में शामिल हुए नेताओं का कहना है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी खुद को एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के तौर पर तैयार कर रही है।
इस मौके पर हनुमान बेनीवाल ने कहा कि आरएलपी किसानों, युवाओं और आम जनता की आवाज पहले से कहीं ज्यादा मजबूती से उठाएगी। वहीं ताराचंद सहारन ने दावा किया कि उनके आने से सरदारशहर और चूरू जिले में संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और पार्टी का आधार और मजबूत होगा।
कुल मिलाकर यह सियासी बदलाव कांग्रेस के लिए चिंता की घंटी है, जबकि आरएलपी के लिए यह एक बड़ा अवसर बनकर उभरा है। आने वाले समय में पंचायत और निकाय चुनाव होने हैं, ऐसे में यह बदलाव आरएलपी को जमीनी स्तर पर मजबूती दिला सकता है और प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण गढ़ता नजर आ रहा है।

Author: aapnocitynews@gmai.com




