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माता–पिता की सेवा सर्वोच्च धर्म—इससे बड़ा कोई तीर्थ नहीं : महामंडलेश्वर बजरंग दास महाराजबुटाटी में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ रहा भक्तों का सागर, भक्ति–रस में झूम उठे श्रद्धालु

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मेड़ता सिटी/बुटाटी। तेजाराम लाडणवा
बुटाटी की धार्मिक एवं आध्यात्मिक फिज़ा में इन दिनों श्रीमद्भागवत कथा का रस–धार प्रवाहित हो रहा है। नवनिर्मित सार्वजनिक हिन्दू धर्मशाला के उद्घाटन के उपरांत सात दिवसीय कथा के दूसरे दिन श्रीबालाजी सेवा धाम के पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित महामंडलेश्वर आचार्य बजरंग दास महाराज के दिव्य वचनों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथा स्थल पर हजारों की भीड़ उमड़ी, दर्शन व श्रवण को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
महाराज श्री ने श्री शालिग्राम जी की महिमा का बखान करते हुए कहा कि “जिस गृह में श्री शालिग्राम का विग्रह विद्यमान रहता है, वह एक किलोमीटर की परिधि में तीर्थस्थल तुल्य पवित्र हो जाता है। शालिग्राम की सेवा करने से घर, कुल व परिवार पर अनंत कृपा बरसती है।”
माता–पिता की सेवा ही सच्चा तीर्थ
युवा पीढ़ी को सम्बोधित करते हुए महाराज श्री ने कहा कि आज के समय में माता–पिता की सेवा ही परम धर्म है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—“देवी के मंदिर में चुनरी चढ़ाने से पहले घर की देवी यानी माता की सेवा करें। पिता के सम्मान से ही पुत्र का भविष्य उज्ज्वल और जीवन प्रगतिशील होता है। जिस घर में माता-पिता प्रसन्न रहते हैं, वहाँ ईश्वर स्वतः वास करते हैं।”
उन्होंने कहा कि केवल मंदिर व तीर्थों की यात्रा ही धर्म नहीं, बल्कि माता–पिता की सेवा और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाना भी उतना ही महान धर्म है। “जिस मातृभूमि ने हमें जन्म दिया है, उसके लिए भी हमारी जवाबदेही है। बच्चों में देशभक्ति, अनुशासन और सत्य के संस्कार बोना माता–पिता का भी कर्तव्य है।”
भागवत महापुराण—भक्ति, शक्ति और मुक्ति का महामार्ग
भगवत महापुराण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह कलियुग के समस्त पापों का समूल विनाश करने वाला ग्रंथ है। उन्होंने कहा—“भागवत कथा श्रवण मात्र से भक्त को भक्ति, शक्ति और मुक्ति प्राप्त होती है। जहाँ भागवत कथा होती है वहाँ स्वयं भगवान उपस्थित होकर अपनी कथा श्रवण करते हैं।”
महाराज श्री ने बताया कि सनातन धर्म का आधार सत्य, अहिंसा, सदाचरण, प्रभु सेवा और मानव प्रेम है। “सनातन धर्म शाश्वत है—सत्य भी है और सत्य का मार्ग भी।”
भक्ति–रस में झूम उठे भक्त
महाराज श्री के मधुर भजनों, कथा रस तथा ओजस्वी वचनों ने वातावरण को भावुक व भक्तिपूर्ण बना दिया। कथा में उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे और भक्तिरस में नृत्य कर मंत्रमुग्ध हो गए।
विशिष्ट संत–महात्माओं व अतिथियों की उपस्थिति
इस दौरान महंत रामनिवास महाराज पो धाम, सुखराम महाराज, देवेन्द्र सिंह बुटाटी धाम, महेंद्र उपाध्याय, महावीर प्रसाद मित्तल, सुरजन सिंह फौजी सहित अनेक विशिष्ट संत व अतिथि उपस्थित रहे।

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