
मेड़ता सिटी (तेजाराम लाडणवा)

मीरा नगरी मेड़ता सिटी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। मालवा माटी के संत पंडित प्रभुजी नागर ने अपने ओजस्वी और सारगर्भित प्रवचनों के माध्यम से श्रीमद् भागवत के मूल तत्व—गुरु भक्ति, सत्य, संयम और आत्मकल्याण—को सरल शब्दों में श्रद्धालुओं के हृदय तक पहुंचाया।
कथावाचक प्रभुजी नागर ने कहा कि “जिसने गुरु की आज्ञा को जीवन का आधार बना लिया, उसका बेड़ा स्वयं भवसागर से पार हो जाता है।” उन्होंने सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए कहा कि सच बोलने वाला व्यक्ति मंदिर के पीछे नहीं, बल्कि आगे के द्वार से चलता है। ऐसे व्यक्ति पर चाहे कितने ही संकट क्यों न आएं, अंततः उसकी नैया पार होती है और विजय उसी की होती है।
उन्होंने समाज को आत्मचिंतन का संदेश देते हुए कहा कि धनवान सेठों और व्यापारियों की जटिल समस्याओं का समाधान चार्टर्ड अकाउंटेंट करते हैं, लेकिन मानव जीवन की पीड़ा, भय और असमंजस का समाधान केवल संतों की संगति और सत्संग से ही संभव है। श्रीमद् भागवत कथा मानव को भीतर से शुद्ध कर उसे धर्म, कर्म और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करती है।
उल्लेखनीय है कि संत प्रभुजी नागर मेड़ता सिटी में दूसरी बार 10 साल श्रीमद् भागवत कथा का वाचन कर रहे हैं, जिससे नगरवासियों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है और पंडाल पूरी तरह खचाखच भरा हुआ नजर आ रहा है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए आयोजकों ने पंडाल विस्तार की संभावनाओं पर भी विचार शुरू कर दिया है।
कथा के दौरान मध्यप्रदेश से आए श्रद्धालु विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ये श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में तीर–कमान लेकर अनुशासित रूप से व्यवस्थाओं में जुटे हैं, जिससे आयोजन स्थल पर एक अलग ही आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक दृश्य उपस्थित हो रहा है।
श्रीमद् भागवत कथा के साथ मेड़ता सिटी का वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो चुका है और नगर में हर ओर भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार दिखाई दे रहा है।

Author: aapnocitynews@gmai.com





