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ऐतिहासिक दृश्य का साक्षी बनी मीरा नगरीभागवत कथा से पूर्व मेड़ता सिटी में गंगा–जमुना–सरस्वती कलश यात्रा, महिलाओं का महासैलाब

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मेड़ता सिटी (तेजाराम लाडणवा)
भक्त शिरोमणि मीरा बाई की जन्मस्थली मीरा नगरी मेड़ता सिटी ने एक बार फिर इतिहास रच दिया। श्रीमद् भागवत कथा के शुभारंभ से पूर्व सोमवार सुबह 10:15 बजे शहर के तीन अलग-अलग स्थानों से सैकड़ों महिलाओं और बालिकाओं की भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इन तीनों यात्राओं को गंगा, जमुना और सरस्वती नाम दिया गया, जिसने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से ऐतिहासिक बना दिया।
लाल साड़ियों में सजी महिलाएं, सिर पर कलश, कलश पर नारियल, और मुख से गूंजते “जय श्रीराम” के जयकारे—पूरा शहर भक्ति में डूब गया। महिलाओं और बालिकाओं के इस सैलाब को देखने के लिए शहर की गलियों, छतों और चौराहों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा।
तीनों कलश यात्राएं जब चारभुजा नाथ मंदिर चौक के सामने एकत्रित हुईं, तो गंगा–जमुना–सरस्वती के संगम का दृश्य ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं तीर्थराज प्रयाग साकार हो उठा हो। हजारों महिलाओं की उपस्थिति ने इस दृश्य को अविस्मरणीय बना दिया।
शहर के हर मोहल्ले, हर गली और हर चौराहे को रंगोली, पुष्पवर्षा और स्वागत द्वारों से सजाया गया था। चारभुजा चौक व्यापार मंडल एवं हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा जगह-जगह पुष्प वर्षा कर कलश यात्राओं का भव्य स्वागत किया गया। पूरे शहर में “जय श्रीराम” के नारों से गूंज फैल गई।
चारभुजा चौक से संगम के पश्चात तीनों कलश यात्राएं एक धारा में परिवर्तित होकर कथा स्थल पंडाल परिसर में पहुंचीं। पंडाल परिसर पहुंचते ही वातावरण “जय श्रीराम”, “जय श्री चारभुजा नाथ” और “मीरा के जयकारों” से गूंज उठा। पंडाल खचाखच भर गया।
आयोजकों द्वारा गाजे-बाजे के साथ श्रीमद् भागवत ग्रंथ को सिर पर धारण कर विधि-विधान से व्यास पीठ पर विराजमान किया गया। इस दौरान मध्यप्रदेश से पधारे मालवा माटी के संत, कथावाचक प्रभुजी नागर के स्वागत में श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कलश यात्रा में कई महिलाएं व पुरुष हाथों में तीर-कमान धारण कर, भक्ति नृत्य करते हुए चलते नजर आए। मेड़ता के इतिहास में पहली बार श्रीमद् भागवत कथा के अवसर पर महिलाओं की इतनी विशाल और ऐतिहासिक सहभागिता देखने को मिली।
श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए कथा स्थल पर पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग पंडाल बनाए गए हैं। महिलाओं का पंडाल पूरी तरह खचाखच भर गया, जो इस आयोजन की ऐतिहासिकता का जीवंत प्रमाण है।
गौरतलब है कि श्रीमद् भागवत कथा 5 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन मूलराज बांकीदास बंगला परिसर, मेड़ता सिटी में आयोजित होगी

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