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जब सड़क बोझ नहीं झेल पाई: लूणियास में माइनिंग की मार, ग्रामीण जीवन बेहाल

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लूणियास की यह सड़क आज एक सवाल बन चुकी है—
क्या समय रहते समाधान होगा,
या ग्रामीणों को यूं ही जोखिम भरे रास्ते पर चलना पड़ेगा?


मेड़ता सिटी (तेजाराम लाएणवा)
सुबह का समय है। लूणियास से बासनी कच्छावा जाने वाली सड़क पर हल्की नमी है। दोपहिया वाहन धीरे आगे बढ़ता है, लेकिन अचानक पहिया फिसल जाता है। चालक किसी तरह संतुलन बना लेता है। यह दृश्य अब आम हो चुका है। लूणियास गांव के ग्रामीण रोज इसी डर के साथ इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं।
यह सड़क अब केवल आवागमन का जरिया नहीं रही, बल्कि चाइना क्ले माइनिंग के दुष्प्रभावों की जमीनी तस्वीर बन चुकी है। सफेद पाउडर की मोटी परत ने इसकी पहचान ही बदल दी है।
ग्राउंड पर हकीकत: सड़क नहीं, फिसलन भरा मैदान
ग्रामीण बताते हैं कि इस मार्ग से दिनभर माइनिंग से जुड़े भारी वाहन गुजरते हैं। लोडिंग के दौरान उड़ने वाला क्ले पाउडर और गिरा हुआ माल धीरे-धीरे पूरी सड़क पर जम गया है। सामान्य मिट्टी की तुलना में यह पाउडर कहीं अधिक चिकना होता है। ओस या हल्की बारिश में सड़क की पकड़ पूरी तरह खत्म हो जाती है।
पैदल चलने वाले लोग दीवार या एक-दूसरे का सहारा लेकर आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। दोपहिया वाहन चालक कई बार पैर जमीन पर टिकाकर सफर तय करते हैं, ताकि गिरने से बच सकें।
बच्चों और बुजुर्गों की मुश्किलें बढ़ीं
इसी रास्ते से रोज स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए सफर जोखिम भरा हो गया है। अभिभावक बच्चों को अकेले भेजने से हिचक रहे हैं। बुजुर्गों का कहना है कि पहले जिस दूरी को कुछ ही मिनटों में तय कर लिया जाता था, अब उसी रास्ते पर बार-बार रुकना और संभलना पड़ता है।
धूल से बिगड़ता स्वास्थ्य, खेतों पर सफेद परत
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान आसपास के खेतों में खड़ी फसलों पर सफेद पाउडर की परत साफ नजर आती है। किसान बताते हैं कि पत्तियों पर जमी यह परत फसलों की बढ़वार को प्रभावित कर रही है। हवा के साथ उड़ती धूल गांव की गलियों तक पहुंच रही है, जिससे आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं।
सड़क पर ही गतिविधियां, मार्ग होता जा रहा संकरा
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार माइनिंग से जुड़े वाहन सड़क के बीच ही खड़े कर दिए जाते हैं। इससे मार्ग और संकरा हो जाता है और आमने-सामने से वाहनों के निकलने में परेशानी आती है। आपात स्थिति में यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
प्रशासन तक पहुंची ग्रामीणों की आवाज
इन सभी समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने हाल ही में मेड़ता उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने सड़क पर हो रही लोडिंग व्यवस्था पर रोक लगाने, सड़क की तत्काल सफाई कराने, धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी का छिड़काव कराने और आवागमन को सुरक्षित बनाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वे माइनिंग गतिविधियों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन लापरवाही के कारण उनकी जान और सेहत दांव पर नहीं लगाई जा सकती।
ग्रामीणों को अब प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद है, ताकि यह मार्ग फिर से सुरक्षित बन सके और लूणियास का सामान्य जीवन पटरी पर लौटे।

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