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ढाणी नागान में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन, कंस वध, रुक्मिणी विवाह व गिरिराज पूजन प्रसंग पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब।

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फुलेरा (दामोदर कुमावत)। कस्बे के निकटवर्ती ढाणी नागान चौक स्थित प्राचीन शिवालय में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अनुपम दृश्य देखने को मिला। कथा स्थल पर दूर-दराज से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो उठा।

वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक नागदा महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण एवं सजीव वर्णन किया। उन्होंने कंस वध, कालिया नाग वध, यमुना लीला, गिरिराज भगवान की महिमा व पूजन प्रसंग को रोचक उदाहरणों एवं भावनात्मक व्याख्या के साथ प्रस्तुत किया, जिससे श्रोता कथा में पूरी तरह तल्लीन हो गए।


कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह प्रसंग का विशेष एवं मार्मिक वर्णन किया गया। नागदा महाराज ने बताया कि विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री देवी रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को ही अपने जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया था। जब भाई रुक्मी द्वारा उनका विवाह जबरन शिशुपाल से तय कर दिया गया, तब रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को पत्र भेजकर सहायता की प्रार्थना की। भक्त की पुकार सुनकर भगवान श्रीकृष्ण विदर्भ पहुंचे और रुक्मिणी का विधिपूर्वक विवाह कर भक्तवत्सलता और धर्म की रक्षा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।

इस भावनात्मक प्रसंग के दौरान कथा पंडाल “जय श्रीकृष्ण” और “राधे-राधे” के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा। कई श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करने लगे, वहीं अनेक श्रोताओं की आंखें भक्तिरस में डूब गईं।कथा के समापन पर भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित किए गए। इसके पश्चात विधिवत आरती संपन्न हुई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। पूरे आयोजन में धार्मिक अनुशासन, सेवा भाव और भक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।इस पावन कथा आयोजन में मुख्य यजमान गौरीशंकर शर्मा, मीना शर्मा, अभिषेक शर्मा, सुनील- राधा, महेश शर्मा, सुधा देवी, शंकर सहाय, संतोष शर्मा, मुकेश शर्मा, जयप्रकाश शर्मा, अनिल दम्बीवाल, लालचंद नागा, ब्रज मोहन, पुरुषोत्तम, लक्ष्मीकांत, हीरालाल, कौशल्या, विनोद देवी, संतोष कुमावत, अंकिता एवं उर्वशी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक व श्रद्धालु उपस्थित रहे।आयोजन समिति एवं ग्रामीणों ने अतिथियों व श्रद्धालुओं के लिए उत्तम व्यवस्थाएं कीं, जिससे कथा स्थल पर भक्तिमय एवं शांत वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक चेतना का स्रोत बताते हुए आयोजकों का आभार प्रकट किया।

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