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बैनर से बैठक तक, विधायक की भूमिका पर सवाल काजल प्रकरण से सामान्य सीट तक, क्या भाजपा में अंदरूनी खींचतान?

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मेडतासिटी (राजनीतिक विश्लेषण)

अब सबसे बड़ा सवाल यही है
क्या भाजपा में यह सब केवल संयोग है,या फिर मेड़ता में सियासत किसी नई दिशा की ओर बढ़ रही है?

मीरा नगरी मेड़ता सिटी पूर्व में प्रस्तावित मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मेड़ता दौरे को लेकर हेलीपैड से लेकर पूरे शहर में भव्य स्वागत की तैयारियां की गई थीं। स्थानीय विधायक की ओर से हेलीपैड पर मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए बैनर भी लगाए गए थे, लेकिन अंतिम समय में मुख्यमंत्री का दौरा निरस्त हो गया।
दौरा रद्द होने के बाद सामने आई एक घटना ने शहर की राजनीति में बड़ा बवाल खड़ा कर दिया।
बताया गया कि अज्ञात लोगों द्वारा विधायक के चेहरे पर काली स्याही/काजल लगा दिया गया, जबकि मुख्यमंत्री के चेहरे से छेड़छाड़ नहीं की गई। इस घटना को लेकर न केवल मेड़ता में बल्कि प्रदेश स्तर तक नाराजगी देखने को मिली।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे विधायक का अपमान और साजिश बताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई के नहीं होने से मामला और ज्यादा संदिग्ध बनता जा रहा है।
अब बैठक में दिखी दूरी, फिर उठे वही सवाल
इसी घटनाक्रम के बाद अब नगर पालिका में मुख्यमंत्री के 23 दिसंबर को प्रस्तावित दौरे को लेकर आयोजित बैठक में विधायक को सामान्य सीट पर बैठते देखना,और वीआईपी चेयर से दूरी,शहर में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
राजनीतिक जानकार इसे महज संयोग नहीं मान रहे। सवाल यह उठ रहा है कि—
क्या पार्टी के भीतर विधायक को लेकर असहजता है?
या फिर यह सब अंदरूनी गुटबाजी का संकेत है?
अथवा संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी उजागर हो रही है?
गुटबाजी या संगठनात्मक संदेश?
मेड़ता की राजनीति में अब यह चर्चा आम है कि
राजनीति में मंच, बैनर और बैठने की व्यवस्था सिर्फ औपचारिकताएं नहीं होतीं, बल्कि कई बार यह साफ संदेश देती हैं।
बैनर प्रकरण में कार्रवाई न होना और अब बैठक में विधायक की दूरी—
इन दोनों घटनाओं को जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्टी के लिए बढ़ती चुनौती ऐसे समय में जब किसान आंदोलन तेज हैं,
सरकार के खिलाफ जन आक्रोश बढ़ रहा है, और मुख्यमंत्री का दौरा पहले ही कई बार रद्द हो चुका है,
विधायक को लेकर उठते ये सवाल पार्टी की एकजुटता पर सीधा असर डाल सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या भाजपा में यह सब केवल संयोग है,या फिर मेड़ता में सियासत किसी नई दिशा की ओर बढ़ रही है?

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