
श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुनकर श्रद्धालु हुए भाव विभोर।
फुलेरा(दामोदर कुमावत) ढाणी नागान स्थित शिवालय चौक पर आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला कि पूरा क्षेत्र धर्म परायण हो गया। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का भाव पूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किया गया,

वहीं भारतवर्ष की महिमा,भारत के नामकरण और इसकी सनातन परंपरा का विस्तृत वर्णन कर श्रोताओं को गौरव का अनुभव कराया गया।
कथावाचक पंडित दिलखुश नागदा महाराज ने अपनी सुस्पष्ट, ओजस्वी और प्रभाव शाली वाकशैली में कहा कि भारतवर्ष केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि ऋषि-मुनियों की तपोभूमि और देवताओं की क्रीड़ास्थली है। उन्होंने बताया कि भारत का नाम चक्रवर्ती सम्राट राजा भरत के नाम पर है, जिन्होंने धर्म और न्याय के मार्ग पर निर्भीकता से चलकर संपूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में बांधा।

इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालुओं ने भारतभूमि के प्रति गर्व की अनुभूति की। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान जैसे ही कंस की कारागार में नंदनंदन के अवतरण का वर्णन हुआ, कथा स्थल पर उल्लास का सैलाब उमड़ पड़ा। भजनों, जयकारों, ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के बीच ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं मथुरा नगरी में जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा हो। श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे और पूरा वातावरण आनंदमय हो गया।

कथा में नरसिंह भगवान के प्राकट्य, वामन अवतार, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म, राम-जानकी विवाह जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का भी सजीव और भावनात्मक वर्णन किया गया। इन दिव्य कथाओं को सुनकर भक्तगण भाव-विभोर हो गए और कथा स्थल पर भक्ति की अविरल धारा बहती रही।
इस धार्मिक आयोजन के मुख्य यजमान गौरीशंकर शर्मा, मीना शर्मा, अभिषेक शर्मा, अंजली शर्मा, मयंक शर्मा, शंकर सहाय गौड, संतोष गौड, सुनील एवं राधा गौड, मानसी गौड, हरीश शर्मा, लालचंद नागा, अनिल कुमावत, सीताराम, ब्रजमोहन, बाबूलाल सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के प्रबुद्धजन, धर्मप्रेमी और ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

Author: aapnocitynews@gmai.com





