
विवाह पूर्व दियासैनी की बिंदौरी बनी सामाजिक प्रगतिशीलता का प्रेरक संदेश।
फुलेरा (दामोदर कुमावत) माली समाज फुलेरा की बेटी दिया सैनी के विवाह से पूर्व उनके परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से घोड़े पर बैठाकर बिंदौरी निकाली गई। इस अनोखी पहल ने पूरे क्षेत्र में सकारात्मकता, समानता और सामाजिक जागरूकता का एक सशक्त संदेश प्रसारित किया है।

परंपराओं में आमतौर पर पुत्रों को मिलने वाला यह सम्मान, दियासैनी के परिवार ने बेटी को प्रदान कर समाज के लिए एक मिसाल कायम की है कि आज की बेटियाँ केवल परंपराओं को निभाने वाली नहीं, बल्कि उनका नेतृत्व करने का सामर्थ्य भी रखती हैं।दिया की माता प्रिया सैनी,जो उपजिला चिकित्सालय फुलेरा में लैब असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं, ने बताया कि परिवार की सदैव यह इच्छा रही है कि बेटी को वही अवसर और सम्मान मिले जो किसी भी पुत्र को दिए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि बिंदौरी निकालने का उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि बेटियाँ अब नेतृत्व,नवाचार और सामाजिक बदलाव की धुरी बन रही हैं।दिया के नाना चिरंजीलाल सैनी,सेवानिवृत्त ट्रेन मैनेजर, और नानी कमला सैनी के संस्कार व प्रोत्साहन ने भी इस निर्णय को मजबूत आधार प्रदान किया है। गौरतलब है कि दिया सैनी का विवाह 25 नवंबर को ब्यावर जिले के बर ग्राम के निकट धौलीधेड निवासी विनोद बागड़ी से होना निर्धारित है। विवाह पूर्व आयोजित यह बिंदौरी केवल एक रस्म नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान और समानता का प्रतीकात्मक संदेश थी।
समाज प्रतिनिधियों ने इस पहल को महिला सशक्तिकरण की दिशा में”मील का पत्थर” बताते हुए कहा कि ऐसी पहलें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी। यह दर्शाती है कि परंपरा और प्रगतिशीलता का समन्वय ही किसी समाज की वास्तविक प्रगति का आधार होता है।

Author: aapnocitynews@gmai.com





1 thought on “बेटियाँ भी संभाल सकती हैं, परंपरा की बागडोर।”
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