
विद्वान पंडितो द्वारा विधि विधान पूर्वक मंत्रोच्चारण से मंदिर में विराजे श्याम बाबा।
महा आरती, महाभोग के बाद भक्तों ने पाई पंगत प्रसादी।
फुलेरा (दामोदर कुमावत)
देवी देवताओं की नानी यानी देवयानी, एवं शक्तिपीठ मां शाकंभरी की कृपा पावनी धरा, जहां अरावली की गोद में बसी विश्व प्रसिद्ध सांभर झील सदियों से आस्था और प्रकृति का संगम रही है,

जहां एक दिव्य पुंज प्रकाशित होते हुए प्राचीन झील के तट पर स्थित नवनिर्मित व भव्य श्री श्याम मंदिर में भगवान बर्बरीक श्याम प्रभु की दिव्य मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव भव्यता के साथ रविवार को संपन्न हुआ। यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति की अनंत धारा का प्रतीक है, जो महाभारत काल के वीर बर्बरीक—जिन्हें श्रीकृष्ण स्वयं ने ‘श्याम’ नाम से विभूषित किया—की अमर गाथा को जीवंत करता है।

बर्बरीक का शीशदान, जो महा भारत युद्ध के साक्षी बना, आज भी श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति की ज्योति जलाता है। इसी पावन परंपरा को समर्पित होकर श्याम रंगीला परिवार सेवा समिति ने इस ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा विद्वान पंडितो द्वारा पांच दिवसीय महायज्ञ में सवा करोड़ से अधिक आहुतियां देकर इस देवधरा एवं यहां के संपूर्ण वायु मंडल और वातावरण को शुद्ध कर दिया, प्राण प्रतिष्ठा पश्चात हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं- भक्तों की उपस्थिति में महा आरती का भव्य आयोजन हुआ

जिसको देख इंद्र ने भी अपनी छटा बिखेरी, इस पुनीत कार्य में सम्मिलित हुए हजारों की तादाद में लोगों ने पंगत प्रसादी ग्रहण कर अपने आप को गोरांवित महसूस किया।वहीं सर्व समाज के श्रद्धालु एवं भक्तों ने इसमें भाग लेकर इसे एकता और समरसता का प्रतीक बनाया।सांभर झील,जो विश्व प्रसिद्ध खारे पानी की झील के रूप में जानी जाती है, जो सदियों से आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह क्षेत्र देवासुर संग्राम काल से जुड़ा है, जहां देवयानी तीर्थ और शाकंभरी देवी मंदिर जैसे पावन स्थल भक्ति की जड़ें मजबूत करते हैं।

इसी पावन भूमि पर श्याम प्रभु का मंदिर स्थापित होना, भगवान बर्बरीक की कथा को साकार करता है—जिसने अपना शीश दान कर धर्म की रक्षा का संकल्प लिया था।
पांच दिवसीय महोत्सव: यज्ञ, भजन और संतों का आगमन, साथ ही पांच दिवसीय मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ हुआ, प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं: 11 कुंडीय महायज्ञ: वेद मंत्रों की ध्वनि और हवन की सुगंध से परिसर गुंफित रहा। यह यज्ञ भगवान श्री श्याम कृपा प्राप्ति के लिए समर्पित है, जहां आहुतियां धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का संदेश देंगी।
प्राण प्रतिष्ठा: भगवान श्याम प्रभु अपनी नवस्थापित भव्य मूर्ति में विराजमान होंगे। यह क्षण सांभर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से अंकित होगा, जहां मंत्रों की गूंज और घंटा ध्वनियों से आकाश गूंज उठा।यह महोत्सव सांभर झील को धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनाने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा। झील का प्राकृतिक सौंदर्य—जहां फ्लेमिंगो पक्षियों का झुंड और चमचमाती नमक की परतें रमणीय दृश्य रचती हैं—भक्ति के साथ मिलकर एक अद्भुत अनुभव देगा।

Author: aapnocitynews@gmai.com






1 thought on “श्री श्याम प्रभु की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आगाज।”
Very nice covrege