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हम कौन थे,क्या हो गए और क्या होंगे अभी। आओ विचारें आज मिलकर,यह समस्याएं सभी।।

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राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त जी की काव्य पुस्तक ‘भारत-भारती’के अंश पर हमें आज के परिप्रेक्ष्य में न केवल मनन करने की जरूरत है बल्कि दैनिक जीवन में हर पल व्यावहारिक रूप से जीवन का अहम हिस्सा बनाने की नितांत आवश्यकता है‌।

21वीं सदी में आज हम विविध क्षेत्रों में सकारात्मक रूप से लगातार आगे बढ़ रहे हैं;लेकिन भारतीय संस्कृति की मूल विचारधारा एवं परंपरा जैसे-वृद्धजनों का आदर,माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान इत्यादि में निरंतर ह्रास होता जा रहा है।पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव एवं भौतिकवादी सांसारिक मोहमाया की चकाचौंध में नशे की प्रवृत्ति,साइबर अपराध,सोशल मीडिया का दुरुपयोग,भाग दौड़ भरी जिंदगी,नैतिकता का पतन इत्यादि कई कर्मों से समाज में चहुंओर नकारात्मक वातावरण पनपता जा रहा है,कारणवश विविध प्रकार के अकल्पनीय अपराध परिवारजनों द्वारा ही कारित किए जा रहे हैं।


छोटी सी गलती करें नुकसान,
छिनें खुशियां और मुस्कान।
अगर जिम्मेदारी की बात की जाए तो हर कोई इसका जिम्मेदार सुनिश्चित है।बालक का पहला विद्यालय उसका परिवार होता है।अंकुरित बीज से जो पौधा अभी-अभी उगने का प्रयास कर रहा है,उस पौधे को खाद,पानी,वायू ,प्रकाश इत्यादि जितनी बेहतर गुणवत्ता का मिलेगा,उस पौधे के पेड़ बनने एवं चरिंदों-परिंदों व राहगीरों के लिए उतना ही अधिक लाभकारी होगा।
मिटा दे अपनी हस्ती को अगर कुछ मर्तबा चाहिए,
दाना खाक में मिलकर गुले गुलजार बनता है‌।
हमारा राष्ट्र भारत अभी वैश्विक स्तर पर विकासशील स्तर से विकसित स्तर की ओर प्रगति कर रहा है। साथ ही सैकड़ों वर्षों की गुलामी के बाद हमने स्वतंत्र भारत में हमने शिक्षा,स्वास्थ्य,विज्ञान,तकनीकी,आर्थिक अर्थात हर क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहे हैं।हमारे लोकतांत्रिक भारत राष्ट्र में निरंतर लोक व तंत्र के बीच की खाई का कम होना शुभ संकेत है।प्रगति के पद पर अग्रसर राष्ट्र में हर कार्य के संपन्न होने के लिए केवल मात्र सरकारी महकमें को ही पूर्णत: जिम्मेदार मानने की आवश्यकता ना होकर हम सब नागरिकों को अपने मूल कर्तव्यों को भी जीवन का अहम हिस्सा बनाने की हर पल आवश्यकता है।अगर हम सब मिलकर प्रयास करें तो निसंदेह परिणाम सदैव सुखद होंगे।किसी विद्वान ने सही ही कहा है-
पूरी धरा साथ दे तो और बात है,
आप जरा भी साथ दें तो और बात है। चलने को तो एक पांव पर चलते हैं लोग,
पर दूसरा साथ दे तो और बात है।।
जय हिंद!
जय भारत!
नूर मोहम्मद
वृत्ताधिकारी(मेड़ता सिटी)

Aapno City News
Author: Aapno City News

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